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वासंती मौसम लिखे अंग -अंग पर छंद

Posted On: 29 Feb, 2012 में

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बार -बार मन में उठे उमंग की तरंग
फागुनी बयार मद भरे अंग- अंग है ,
रग- रग में मलय पवन भरे सुवास
आज पग-पग पर बिछा राग- रंग है |
कंचुकी की डोरी कस दी भौजी ने इतनी क़ि
तंग हुए वसन से गोरी तंग-तंग है |

| बिखरे प्यार के रंग | |
ऋतुराज चढ़ गया यौवन- सोपान पर
मुखरित हो गया धरा का अंग- अंग है ,
रंग-रंग के कुसुम खिले वन- उपवन
अलि- आवली फूलों के डोलरही संग है |
आन- बान ,ताम-झाम निरख के ठाम- ठाम
निर्मोही आज तो शिशिर हुआ दंग है |
गोरी की आखों में कई बिखरे प्यार के रंग
दौड़ने औचक लगे मन का तुरंग है
| अंग- अंग पर छंद |
वासंती मौसम लिखे अंग- अंग पर छंद
दसों- दिशाओं में फैल गयी आज गंध है ,
रग-रग से है अनुराग- धार बह रही
कामिनी के मुख मुस्कान मंद- मंद है |
क्षणे- क्षण मन में मिलन-घन झर रहा
धीरज का टूट रहा अब तटबंध है ,
मदिर नयन से हुलक रहे रति- देव
गोरी के अन्तःपुर ऐसा मचा द्वन्द है |

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bdsingh के द्वारा
September 2, 2013

फागुनी बयार ,गोरी ,वसंती मौसम ,नव यौवन का फैलता हुआ प्रभाव। अच्छी रचना।

minujha के द्वारा
March 5, 2012

विजय जी नमस्कार फागुन में रंगीले और मस्ती भरे आपके इन छंदों ने समां बांध दिया,बधाई स्वीकार करें 

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 6, 2012

    मीनू जी , अभिवादन ! मेरे ये छंद आप को अच्छे लगे , मुझे मेरे मन में हर्ष की अनुभूति हुई , कृपया लेखन-संपर्क बनाये रखें | सधन्यवाद !!

Jayprakash Mishra के द्वारा
March 5, 2012

क्या खूब

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 6, 2012

    जयप्रकाश जी , सस्नेह नमस्कार ! आप की छोटी पर दमदार प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ! आगे भी संपर्क बनाये रखें !!

Jayprakash Mishra के द्वारा
March 5, 2012

क्या खूब विजय जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 6, 2012

    अति प्रेम व दुबारा बधाई के लिए आभारी हूँ !!~

dineshaastik के द्वारा
March 5, 2012

गंजन जी नमस्कार, सुन्दर रचना  के लिये बधाई के साथ साथ होली के रंगीन पर्व पर आपको सपरिवार इन्द्रधनुषी शुभकामनायें। कृपया अपनी समालोचात्मक प्रतिक्रिया से अनुग्रहीत करें- http://dineshaastik.jagranjunction.com/?p=60&preview=trueक्या सचमुच ईश्वर है (कुछ सवाल)

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 5, 2012

    मान्यवर आस्तिक जी , सादर अभिवादन ! सर्वप्रथम होलिकोत्सव की अनंत मंगल- कामनाएं स्वीकारें | सार्थक टिपण्णी के लिए आभारी हूँ , ईश्वर,पर प्रतिक्रिया प्रेषित है , कृपया देखें !!

nishamittal के द्वारा
March 4, 2012

ऋतुराज बसंत और फागुन के स्वागत में सुन्दर रचना.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 5, 2012

    श्रद्धेया निशा जी, सश्रद्ध अभिवादन ! मूल्यवान प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ | कृपया (ये हैं शंख डपोर व चुनावी हलचल ) पर अपनी विहंगम दृष्टि डालने का कष्ट कर अनुगृहीत करेंगी |सधन्यवाद !!

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 4, 2012

ऋतुराज चढ़ गया यौवन- सोपान पर………. आचार्य सर, सादर प्रणाम आप की ये पन्तियाँ ही दर्शा रही है की फागुन अपनी रुबाब पर आने वाला है होली की संगीतों को प्रदर्शित करने का अनोखी शैली आपकी ………….एक बात जोड़ना चाहूँगा सर शायद आपका ध्यान ना गया हो ………. इतने सुन्दर भाव वाले कविता को थोड़ा रंगीन बनाने की जरुरत है आप आगे से कविता को लिखने के बाद उसे कलर कर साथ में फोटो भी लगावे ताकि पढने में और देखने में उसकी निखारता और बढ़ जाए ……यदि किसी प्रकार की परेशानी हो तो बोलिएगा …………..आपको तथा आपके समस्त परिवार को होली मुबारक

    March 4, 2012

    सादर प्रणाम, बसंत की खुशबू और होली के रंगों से सजी रचना…..बधाई हो.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 6, 2012

    मान्य भाई प्रवीण जी , सप्रेम अभिवादन !! आप की सुन्दरतम प्रतिक्रियार्थ आभार || रंग-रोगन के सम्बन्ध में दिए गए सुझावों का ख्याल रखूँगा ,कृपया इस सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध कराने का कष्ट करें ! ( तकनिकी खराबी के कारन चौथी बार में पोस्ट हो पा रहा है , एतदर्थ मुझे खेद है )

shashibhushan1959 के द्वारा
March 4, 2012

आदरणीय आचार्य जी, सादर ! लग रहा है कि फागुन आ गया, होली भी आ गई ! बेहतरीन रचना !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 4, 2012

    श्रद्धेय शशिभूषण जी , अभिवादन !! आप की प्रतीक्षा सदैव बनी रहती है | ख़त्म हुई | बहुत- बहुत आभारी हूँ !

yogi sarswat के द्वारा
March 3, 2012

गुंजन जी , फागुन की मस्ती और प्रेम का खूबसूरत भाव लिए बहुत सुन्दर कविता प्रस्तुत की है आपने ! साधुवाद ! अपने लेख पर आपके विचार चाहूँगा , कृपया समय दीजियेगा ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/23

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 3, 2012

    सारस्वत जी ,मेरे ये छंद आप को अछे लगे | आभारी हूँ ! आगे भी संबध बनाए रखें |

मनु (tosi) के द्वारा
March 2, 2012

विजय जी समुच बहुत सुंदर रचना …हर पंक्ति में उल्लास और उमंग,,,,बधाई

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 2, 2012

    मान्या (तोसी ) जी , मेरे वासंती- छंद और उनके भाव आपको अच्छे लगे , लेखन की सफलता भी इसी में है ,जब किसी की रचना किसी को अच्छी लगे | बहुत- बहुत धन्यवाद – लेखन -संपर्क बनाए रखें !

akraktale के द्वारा
March 1, 2012

विजय जी, आपने अपनी तीन छोटी मगर सुन्दर रचनाओं को एक साथ मंच पर सादर किया है. सभी सुन्दर फागुन का उत्साह बढ़ाती रचनाएं. बधाई.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 1, 2012

    मान्य भाई , नमन ! आप की प्रतिक्रिया से उत्साह बढ़ता है और आगे कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है | आभारी हूँ !


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