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"उठो केजरीवाल देश को दो अब नया विकल्प "

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kejriwal_arvind_iac_ap लिखो नयी पट-कथा देश की
रचो नया इतिहास,
गाँव-गाँव में नगर-नगर में
फैले नया उजास |
रिद्धि-सिद्धि – समृद्धि देश से
है अब कोसों दूर ,
अमन-चैन को निगल गए हैं
मिलकर सारे क्रूर |
मिटे भूख-भय – संशय मन से
मिट जाए संत्रास !
लिखो नई……!!
महंगाई राक्षसी फाड़ मुह
रही यहाँ विकराल ,
उधर धुरंधर महारथी सब
बजा रहे हैं गाल,
सोने की चीड़ी को सबमिल
बना रहे निज ग्रास !
लिखो नयी…..!!
घमासान है मचा चतुर्दिक
केवल लूट-खसोंट,
भूखे जन बिलबिला रहे हैं
वे खाएं अखरोट |
असली मालिक जनता देखो
बन बैठी है दास !
लिखो नयी…..!!
बढ़ो केजरीवाल देश को
दो अब नया विकल्प ,
नहीं और अब मिटने देंगे
लेना है संकल्प |
उठो-उठो बाँटो जन-मन में
नव जीवन उल्लास !
लिखो नई …….!!
घर-घर में बेबसी और बस
फैली है लाचारी ,
मस्ती काट रहे नेता-गण-
बड़े-बड़े व्यापारी |
जो जितने ऊँचे बैठे हैं
उतनी ऊँची प्यास !
लिखो नई …..!!
आचार्य विजय ‘गुंजन ‘

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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Santlal Karun के द्वारा
February 20, 2013

आदरणीय गुंजन जी, जो भी हो अन्ना हजारे और केजरीवाल असफलता के बावजूद भ्रष्टाचार से ऊबी जन-चेतना के प्रतीक तो बन ही गए हैं | आप ने उसी प्रतीक को मेरुदण्ड मानकर यह गीत रचा है | इसमें जन-चेतना के अनुकूल नवीन लोकतांत्रिक स्वप्न और उसकी साकारता का आह्वान किया गया है | बेबसी-लाचारी के मुहाने पर इस चेतना-गीत के लिए सहृदय साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 4, 2013

    आदरणीय करुण जी , सादर अभिवादन !… पता नहीं कैसे आप के इस अहं मंतव्य को नहीं देख पाया और yah अनुत्तरित रह गया ! क्षमा याचना सहित ! पुनश्च !!

ajay kumar pandey के द्वारा
December 20, 2012

आदरणीय आचार्य जी मेरा मानना है की यह आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार को ख़त्म करने में नए आयाम देगी में देर से आने हेतु आपसे शमा चाहता हूँ आपने मेरा बाल विवाह के लेख का मंतव्य समझा उसका आभार प्रकट करता हूँ में अपने ब्लॉग पर दिल्ली एक आपराधिक राजधानी क्यों वाले लेख पर आपको अपने विचार देने के लिए आमंत्रित करता हूँ कृपया देखिये धन्यवाद

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 21, 2012

    मान्य अजय जी , सस्नेह !…… सह्मत्यात्मक प्रतिक्रया के लिए आभारी हूँ और आप का आमंत्रण स्वीकार करता हूँ ! सधन्यवाद !

seemakanwal के द्वारा
December 10, 2012

बहुत सार्थक रचना ,हार्दिक धन्यवाद . एक धुंधली सी किरण नजर आ रही है .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 11, 2012

    सीमा जी , सादर !…. घना धुंध का आवरण अवश्य छंटेगा , ज़रा विलम्ब होगा ! रचना पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

ANAND PRAVIN के द्वारा
December 8, 2012

आदरणीय विजय सर, सादर प्रणाम बहुत दिनों बाद एक पार्टी आई जो अपनी पार्टी कही जा सकती है…….बसरते वो सकारात्मकता को बनाय और बचाय रखें ………..सुन्दर कविता सर और निश्चय ही जोश प्रवलित करती हुई……देर से आने हेतु क्षमा

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 9, 2012

    मान्य भाई प्रवीण जी, सादर नमस्कार !…..देर से आये तो क्या हुआ , अच्छी प्रतिक्रया के साथ तो आए ! देखिये केजरीवाल जी कहाँ तक सफल होते हैं ? चांडाल चौकड़ी की की टोलियाँ हाथ धोकर पीछे पड़ी है ! सधन्यवाद !

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
December 4, 2012

उधर धुरंधर महारथी सब बजा रहे हैं गाल, सोने की चीड़ी को सबमिल बना रहे निज ग्रास ! लिखो नयी…..!! आचार्यजी, कठोर वर्तमान की दुश्वारियों के बीच आशावादी प्रस्तुति…. किसी न किसी को तो उठना ही पड़ेगा….सादर.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 5, 2012

    आदरणीय के.पी. सिंह जी , सादर अभिवादन !……. उत्साह बढ़ा मेरा, आप की सहमति से ! हार्दिक आभार ! पुनश्च !

प्रवीण दीक्षित के द्वारा
December 3, 2012

सूचनात्मक ,यथार्थवादी….साथ ही साथ सुन्दर प्रस्तुति . बधाई ! http://praveendixit.jagranjunction.com/ हमारा मूल्यांकन अपने कमेंट्स से करने का कष्ट करें , धन्यवाद!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 5, 2012

    मान्य प्रवीण जी , सप्रेम नमस्कार !…….. जो ठीक लगा हमने लिख दिया ! आप की इस रचना पर सहमति के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !

प्रवीण दीक्षित के द्वारा
December 3, 2012

रोचक और मत निर्माता पन्तियाँ ; बहुत उम्दा बहुत अच्छी कविता !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 5, 2012

    हार्दिक आभार प्रवीण जी आप की इस सार्थक प्रतिक्रियार्थ !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
December 2, 2012

सोने की चीड़ी को सबमिल बना रहे निज ग्रास ! लिखो नयी…..!! घमासान है मचा चतुर्दिक केवल लूट-खसोंट, भूखे जन बिलबिला रहे हैं वे खाएं अखरोट | असली मालिक जनता देखो बन बैठी है दास ! आदरणीय आचार्य जी बहुत सुन्दर ..जनता का दर्द और आज के सामजिक हालात के सजीव चित्रण के लिए बधाई काश इन बहके हुए लोगों के बहरे कानों में भी ये आवाजें जाएँ तो आनंद और आये केजरीवाल जी के लिए शुभ कामनाएं भ्रमर ५

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 2, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी , साभिवादन !…….उत्साहबर्धक प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! वैचारिक समानता के लिए अतिरिक्त आभार ! पुनश्च !!

Sushma Gupta के द्वारा
December 2, 2012

आचार्य विजय जी, आपने अपनी इस समसामयिक रचना में देश की दुर्दशा का एक मर्मान्तक चित्रण प्रस्तुत किया है इस हेतु मैं भी यही कहूँगी.. आज देश की नैया डूव रही वीच मझधार,डुवो रहे किनारे वाले,अब केजरी ही आधार.. .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 2, 2012

    सुषमा जी, सादर !…….सहमति के रूप में सार्थक प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! अब देखना यही है — देश की जनता कहाँ तक केजरीवाल का साथ निभाती है ! पुनश्च !!

yamunapathak के द्वारा
December 2, 2012

रिद्धि-सिद्धि – समृद्धि देश से है अब कोसों दूर , अमन-चैन को निगल गए हैं मिलकर सारे क्रूर | मिटे भूख-भय – संशय मन से सटीक पंक्तियाँ हैं गुंजन जी. साभार

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 2, 2012

    माननीया यमुना जी, सादर अभिवादन !……..रचना पर सहमति और प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ! पुनश्च !!

mayankkumar के द्वारा
December 1, 2012

आपका लेख वाकई पढ़ कर कृतज्ञ हुआ ………….. सधन्यवाद .. !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 1, 2012

    मयंक जी, सप्रेम !……. मेरी कविता आप को अच्छी लगी , तदर्थ आभारी हूँ ! पुनश्च !!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 30, 2012

सुन्दर आवाहन समय की पुकार बधाई हो स्वीकार आदरणीय महोदय जी सादर

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 30, 2012

    श्रद्धेय कुशवाहा जी , सादर अभिवादन !…..सह सहमति के लिए हार्दिक आभार ! कृपया स्नेह बनाए रखें !

akraktale के द्वारा
November 26, 2012

लिखो नयी पट-कथा देश की रचो नया इतिहास, गाँव-गाँव में नगर-नगर में फैले नया उजास | वाह आदरणीय आचार्य जी क्या खूब प्रवाहमयी रचना लिखी है कि लगा पढता ही जाऊं. सच है अब तो सिर्फ केजरीवाल ही देश कि आस है. सुन्दर रचना पर बधाई स्वीकारें.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 26, 2012

    मान्य भाई अशोक कुमार रक्तले जी, सादर नमन !………उत्साह बर्धन के लिए आभारी हूँ और वैचारिक समानता से उत्साहित भी ! शुभ रात्री !!

nishamittal के द्वारा
November 26, 2012

बहुत सुन्दर चित्रण जो जितने ऊँचे बैठे हैं उतनी ऊँची प्यास ! ईश्वर करे देश को सार्थक विकल्प मिले

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 26, 2012

    श्रद्धेया निशा जी, सादर अभिवादन !……… जो मन को अच्छा और उचित लगा , लिख दिया ! हार्दिकता के लिए आभार !!

shashibhushan1959 के द्वारा
November 26, 2012

आदरणीय आचार्य जी, सादर ! जोश और ललकार भरी रचना ! देशभक्त अरविन्द का साथ हम सभी को खुले दिल से देना चाहिए ! इस परिप्रेक्ष्य में आपकी यह रचना मन को भा गई ! बहुत सुन्दर ! “”घर-घर में बेबसी और बस फैली है लाचारी , मस्ती काट रहे नेता-गण- बड़े-बड़े व्यापारी | जो जितने ऊँचे बैठे हैं उतनी ऊँची प्यास ! लिखो नयी पट-कथा देश की रचो नया इतिहास !”" अब नई पटकथा लिखने का समय आ गया है ! सादर !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 26, 2012

    श्रद्धेय बड़े भाई , सादर अभिवादन !……इसका मतलब मेरा वैचारिक दृष्टिकोण सही है ! हार्दिक आभार !!

jlsingh के द्वारा
November 26, 2012

बढ़ो केजरीवाल देश को दो अब नया विकल्प , नहीं और अब मिटने देंगे लेना है संकल्प | उठो-उठो बाँटो जन-मन में नव जीवन उल्लास ! आम आदमी साथ चले गर मिट जाएँ सब ख़ास! लिखो नयी पट-कथा देश की रचो नया इतिहास, आचार्य जी, नमस्कार! हम सबको इस ‘आम आदमी पार्टी’ को समर्थन करनी चाहिए! आपके आह्वान से जन जन में चेतना आयेगी !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 26, 2012

    धन्यवाद आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी, मैं आप से बिलकुल सहमत हूँ ! जय हिन्द ! जय हिन्दी !”एक चिंगारी कहीं से ढूंढ लाओ दोस्तों , इस दिए में तेल से भींगी हुई बाती तो है” ! सादर !


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