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" कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं लड़कियाँ "

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784801991 कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं
लड़कियाँ !
गाँव – खेत – खलिहान
शहर – चौक – चौराहे
सभी जगह असुरक्षित हैं
लड़कियाँ
ऑटों – बसों और ट्रेनों में
आसान नहीं है
इनका सफर .
स्कूलों – कालेजों और दफ्तरों में
घूरतीं निगाहें करती रहती हैं
इनकी प्रतीक्षा .
सभी जगह असहज हैं
लड़कियाँ !
संवेदनशून्य जंगली
इन भूखे भेड़ियों के भय
सदैव उन्हें करते रहते हैं
आक्रान्त
अन्दर -बाहर कहीं भी
मिल जाते हैं
ये पाशविक वृत्ति के
वहशी नरपिशाच .
अपने – पराये
रिश्ते – नाते
इन सबके बीच भी
असहाय और बेवश हैं
लड़कियाँ
बाहर तो बाहर
आज अपने घरों में भी
असुरक्षित हैं
लड़कियाँ !
आचार्य विजय ” गुंजन “

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49 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kanchan kishore, jagran के द्वारा
April 22, 2013

अच्‍छी और मार्मिक रचना के लिए बधाई गुंजन जी,

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 24, 2013

    आदरणीय मान्यवर किशोर जी , सादर अभिवादन !………सुन्दर सराहना के लिए आभारी हूँ ! सहयोग व सम्बन्ध बनाए रखें ! विचारों के आदान-प्रदान से संबंधों की प्रगाढ़ता सुनिश्चित रहती है ! सधन्यवाद !!

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
January 29, 2013

संवेदनशून्य जंगली इन भूखे भेड़ियों के भय सदैव उन्हें करते रहते हैं आक्रान्त.. आचार्य जी मानव का ये रूप जंगली से भी बढ़ गया है जंगल में तो सरलता भोलापन दिख भी जाता है यहाँ तो घूरती नजरें असहज कर काल बन जाती हैं सुन्दर रचना भ्रमर ५

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 4, 2013

    मान्य भाई भ्रमर जी , सप्रेम नमस्कार ! हार्दिकता हेतु हार्दिक आभार ! पुनश्च

January 13, 2013

आदरणीय ………………..आप मुझ से निम्न लिंक पर मिल सकते हैं…………… http://merisada.jagranjunction.com/2013/01/06/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%9C%E0%A4%BE/

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 19, 2013

    धन्यवाद ! पहुंचता हूँ |

deepasingh के द्वारा
January 7, 2013

वन्दे मातरम आचार्य जी. सुन्दर शादो सर सजी इस सुन्दर रचना पर आभार स्वीकारे. http://deepasingh.jagranjunction.com पर पधारें.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 11, 2013

    मान्या दीपा जी , सादर !…….सकारात्मक प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! रचनात्मक सहयोग व सम्बन्ध बनाए रखें | punashch !!

January 1, 2013

संवेदनशील रचना के लिए धन्यवाद आचार्य जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 1, 2013

    भाई सुधीर जी , सादर !….प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ !

nishamittal के द्वारा
December 31, 2012

आदरनीय आचार्य जी दो दिन मंच पर अनुपस्थित रहने के कारण आपकी या जागृत करने वाली रचना छूट गयी अपने – पराये रिश्ते – नाते इन सबके बीच भी असहाय और बेवश हैं लड़कियाँ बाहर तो बाहर आज अपने घरों में भी असुरक्षित हैं लड़कियाँ !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 31, 2012

    श्रद्धेया निशा जी , सादर अभिवादन !….. देर से ही सही आप का आशीष मिल तो गया ही ! हाल के घटनाक्रमों ने इन्शान को मर्माहत करने के साथ ही सम्पूर्ण देश को हिलाकर रख दिया ! पूरी दुनिया में इस जघन्य कुकृत्य के निंदा हुई !साभार !!

sudhajaiswal के द्वारा
December 29, 2012

ऑटों – बसों और ट्रेनों में आसान नहीं है इनका सफर . स्कूलों – कालेजों और दफ्तरों में घूरतीं निगाहें करती रहती हैं इनकी प्रतीक्षा . सभी जगह असहज हैं लड़कियाँ ! आदरणीय आचार्य विजय जी, सादर अभिवादन, बहुत सही स्थिति दर्शायी है आपने इस कविता में देवी की तरह पूजने की बातें बस किताबों के पन्नों तक ही सीमित है, जरूरत है लड़कियों की तरह लड़कों को भी नैतिक मूल्यों एवं अपने सस्कारों के बारे में समझाने की, अनुशासन में रखने की | सार्थक रचना के लिए बधाई |

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 30, 2012

    मान्या सुधा जी , सादर !…….मैं आप से इस मुद्दे पर बिलकुल सहमत हूँ , आज की पीढ़ी में ज़रूरत है उन शात्विक संस्कारों को भरने की जिसके आधार-बिंदु पर पूरी मानवीयता का अस्तित्व टिका है ! सधन्यवाद !

December 29, 2012

सादर प्रणाम! अन्दर -बाहर कहीं भी मिल जाते हैं ये पाशविक वृत्ति के वहशी नरपिशाच . अपने – पराये…..सत्य को उजागर करती पक्तियां……………………………

D33P के द्वारा
December 26, 2012

क्या कहे अभी दिल्ली की हवा थमी नहीं कि कल बरेली में शाम को एक कार में चार माने हुए गुंडों ने दो लड़कियों का पीछा करना शुरू किया लड़कियों ने भागना शुरू किया किसी तरह खुद को भी बचाया और लड़के भी पुलिस हिरासत में पहुँच गए !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 27, 2012

    मान्या दीप्ति जी , साभिवादन !…… दुराचारी तो दुराचार करेंगे ही क्यों कि वह उनकी फितरत में शामिल है !कठोर से कठोर फैसले तो सरकार को लेने हैं ताकि कोई भी दुराचारी वैसा करने के पहले हज़ार बार सोंचे पर मैं जानता हूँ ऐसा वे करेंगे नहीं क्यों कि उनके कुछ ख़ास और अपनें लोग वैसे कांडों के अभियुक्त हैं ! आन्दोलनकारी भाई-बहनों की जय हो और दुराचारियों व उनके संरक्षकों का क्षय हो |आमीन !!

seemakanwal के द्वारा
December 26, 2012

आप ने सही कहा लडकियाँ कहीं भी सुरक्षित नहीं है .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 26, 2012

    मान्या सीमा कनवाल जी सादर अभिवादन !…… सह्मत्यात्मक प्रतिक्रिया हेतु आभारी हूँ ! पुनश्च !!

akraktale के द्वारा
December 26, 2012

आदरणीय आचार्य जी सादर, सिर्फ लडकियां ही नहीं पूरी नारी जाति आज समाज में ठगा सा महसूस कर रही है.क्योंकि एक तरफ तो हम उन्हें देवी सामान पूजने की बात करते हैं और दूसरी ओर हकीकत क्या है?बेहद चिंता का विषय है. आपकी सुन्दर रचना पर बधाई स्वीकारें.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 26, 2012

    मान्य भाई रक्तले जी , सादर !…आप से सहमत हूँ ! जो स्थिति है वह बेहद चिंतनीय है ! सहयोग व सम्बन्ध बनाए रखें ! सधन्यवाद !

yogi sarswat के द्वारा
December 26, 2012

संवेदनशून्य जंगली इन भूखे भेड़ियों के भय सदैव उन्हें करते रहते हैं आक्रान्त अन्दर -बाहर कहीं भी मिल जाते हैं ये पाशविक वृत्ति के वहशी नरपिशाच . अपने – पराये रिश्ते – नाते इन सबके बीच भी असहाय और बेवश हैं लड़कियाँ कहीं न कहीं इसमें हम और आप भी दोषी हैं क्योंकि हमने इन्हें सुकोमल , और कुछ दोयम दर्जे की बनाकर रखने में विश्वास किया है ! अगर इन्हें भी पहले से ही दुर्गा के रूप में पूजने के अलावा दुर्गा का प्रचंड रूप भी बताया होता और उसकी तरह ही परवार्सू करी होती तो शायद आज ये इतनी अबला तो न होती जितनी दीखती है ! बेहतरीन काव्य श्री आचार्य जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 26, 2012

    मान्य भाई योगी जी , नमस्कार !…. आप से मैं बिलकुल सहमत हूँ पर नैसर्गिक व प्राकृतिक व्यवस्था को हम कैसे नकार सकते है कि बलापेक्षान्तार्गत महिलाएँ , पुरुषों की अपेक्षा कमज़ोर हुआ करती हैं ! अतः ये सदैव रक्षनीया व वंदनीया हैं ! पुनश्च !

Ravinder kumar के द्वारा
December 26, 2012

गुंजन जी, सादर नमस्कार. कटु पर सत्य को प्रस्तुत करती कविता के लिए आप को बधाई. बाहर तो बाहर आज अपने घरों में भी असुरक्षित हैं लड़कियाँ !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 26, 2012

    मान्य भाई रविंदर जी , सादर अभिवादन !……. सहमति व सराहना के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !

minujha के द्वारा
December 26, 2012

सच्चाई बयान करती सटीक रचना आचार्य जी आभार

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 26, 2012

    सम्मान्या मीनू झा जी, सादर !……. सह्मत्यात्मक टिप्पणी के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !!

ajay kumar pandey के द्वारा
December 25, 2012

आचार्य जी नमन आज बड़ी चिंता होती है यह देखकर की महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं बसों में जब उनके साथ यह घटना घटित हो रही है तो कॉलेज में क्या नहीं होता होगा और आज इसकी आग भी भड़क गयी है आपने प्रतिक्रिया दी उसका आभार मुझे अब एक पत्रकार बनकर इस न्याय प्रणाली को ठीक बनाना है कानून सख्ती से लागू करवाने हैं आप लोगो के आशीर्वाद से ही यह सब हो पायेगा आप बस ऐसे ही मेरी कलम पर आशीर्वाद बनाये रहें मेरा मकसद भारत को एक साफ़ देश बनाना है धन्यवाद

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 25, 2012

    ajay jee, meree shubhkaamnaa aap ke saath hai , pratikriyaarth aabhaaree hoon !

Sushma Gupta के द्वारा
December 24, 2012

आचार्य विजय जी,आपने बिलकुल सही कहा है… आज यत्र, तत्र ,सर्वत्र सम्पूर्ण नारी जाति स्वयं को वेवस ,असहाय व् असुरक्षित अनुभव करती है ,आज के मानव में विकृत मानसिकता आ गयी है,जिसके लिए साम ,दाम ,दंड ,भेद में से कोई भी नीति के द्ववारा सभ्य सामाजिकों को आगे आकर इसे रोकना होगा…तभी समाधान संभव है ..आचार्य विजय जी,आपने बिलकुल सही कहा है… आज यत्र, तत्र ,सर्वत्र सम्पूर्ण नारी जाति स्वयं को वेवस ,असहाय व् असुरक्षित अनुभव करती है ,आज के मानव में विकृत मानसिकता आ गयी है,जिसके लिए साम ,दाम ,दंड ,भेद में से कोई भी नीति के द्ववारा सभ्य सामाजिकों को आगे आकर इसे रोकना होगा…तभी समाधान संभव है ….

    Sushma Gupta के द्वारा
    December 24, 2012

    विजय जी , त्रुटिवश दुवारा पुनरावृत्ति को कृपया हटा दीजिएगा

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 24, 2012

    मान्या सुषमा जी , साभिवादन !……आप ने ठीक ही कहा आज नित्य मानवीय मूल्यों का अवमूल्यन व क्षरण हो रहा है ! विकृतियाँ चप्पे-चप्पे में अपने पर पसारने में संलग्न है ! सहमति हेतु आभार !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 25, 2012

    कोई बात नहीं , ऐसी पुनरावृत्ति भूलवश अक्सर मुझसे भी हो जाया करती है | सधन्यवाद !

jlsingh के द्वारा
December 24, 2012

श्रद्धेय आचार्य जी, सादर अभिवादन! शक्तिस्वरूपा, लक्ष्मीस्वरूपा, विद्यास्वरूपा, माँ, बहन, बेटियां भी यही हैं, फिर क्यों हमने इन्हें इतना असुरक्षित कर रक्खा है …हम सबका नैतिक पतन हो चुका है ..हमारे अन्दर का जानवर वहशी हो गया है, इसीलिये असुरक्षित है ये लड़कियां!…. आइये इन्हें सुरक्षित घेरा प्रदान करें!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 24, 2012

    आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी , सादर वन्दे !… आप की संवेदनात्मक भावनाएं अन्तस्तल को छू गयीं ! हार्दिक आभार ! अब सब कुछ ठीक होनेवाला है | समय आ चुका है ! सादर !

vinitashukla के द्वारा
December 23, 2012

सटीक और चिंतनीय प्रश्न उठाने वाली पोस्ट. साधुवाद.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 24, 2012

    मान्या विनीता जी , सादर !……. सह सहमति व सराहना के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !!

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
December 23, 2012

आदरणीय आचार्य जी, नमस्ते | आपकी बात से मैं पूरी तरह सहमत हूँ | लड़कियों की सुरक्षा तो भगवन भरोसे ही है |

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 23, 2012

    मान्य भाई विवेक जी , सादर !……. बहुत दिनों बाद आप से रूबरू हो रहा हूँ ! पूरा देश जल रहा है , कुकर्मियो के कुकर्म से ! पूरी मानवता शर्मसार है | आप की हार्दिकता के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 23, 2012

आदरणीय आचार्य जी, सादर बिलकुल सही कहा ये हर स्थान पर असुरक्षित हैं. ईश्वर ही इनकी रक्षा करता है. बधाई.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 23, 2012

    श्रद्धेय प्रदीप कुशवाहा जी , साभिवादन !….. आप की हार्दिकता और पीडितायों के प्रति संवेदनशीलता के लिए आभारी हूँ ! सधन्यवाद !

Santlal Karun के द्वारा
December 23, 2012

आदरणीय आचार्य विजय गुंजन जी, नीच पुरुषों की कुदृष्टि-कुकर्म और नारी-अपमान पर अत्यंत सह-संवेदनात्मक, मार्मिक कविता; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! “संवेदनशून्य जंगली इन भूखे भेड़ियों के भय सदैव उन्हें करते रहते हैं आक्रान्त अन्दर -बाहर कहीं भी मिल जाते हैं ये पाशविक वृत्ति के वहशी नरपिशाच . अपने – पराये रिश्ते – नाते इन सबके बीच भी असहाय और बेवश हैं लडकियाँ”

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 23, 2012

    श्रद्धेय करुण जी , सादर अभिवादन !…. आप के द्वारा उद्दृत इन पंक्तियों में आप की सह्मत्यात्मक प्रतिक्रियार्थ आभारी और अभिभूत हूँ ! सधन्यवाद ! पुनश्च !!

alkargupta1 के द्वारा
December 23, 2012

आचार्य जी ,बिलकुल सही स्थिति बयां की है …….आज अपनी सुरक्षा और इन्साफ के लिए ही तो ये लड़कियां ,बेटियां और महिलाएं सडकों पर निकल आयीं हैं …..देश भर में हाहाकार मच हुआ है …पर अभी भी इस पर प्रश्न चिह्न लगा हुआ है…..साभार ..

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 23, 2012

    सम्मान्या अलका जी , सादर !….. अब तो यह अनुत्तरित सा प्रतीत होने लगा है तिसपर सरकार की संवेदनशून्यता तो और मन को विचलित कर पीड़ा पहुंचाने का काम कर रही है ! सह्मति के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !

ajaykr के द्वारा
December 23, 2012

आचार्य जी,सादर प्रणाम | सटीक रचना …..

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 23, 2012

    अजय जी, सप्रेम नमस्कार !…… सहमति के लिए आभारी हूँ !


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