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श्रृंगार का मौसम

Posted On: 18 Feb, 2013 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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______~1
आ गया श्रृंगार का मौसम !

फिर धरा सजने लगी ऐसे
अनकही कुछ बात हो जैसे

आ गया फिर प्यार का मौसम !

फिर खिले टटके सुनहले रंग,
हो गए सुरभित अवनि के अंग |

आ गया गुंजार का मौसम !

सिलवटों में यों पड़े कुछ बल ,
ह्रृदय में होने लगी हलचल !

अकथ के इज़हार का मौसम !

वीथिका में उठी आज उमंग ,
कौन है जिसके न संग अनंग |

आ गया उपहार का मौसम !

सुगढ़ सी लगने लगी छाया,
मधुमास ने कुछ गीत यों गया |

आ गया मनुहार का मौसम !

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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
March 6, 2013

आचार्य जी, अत्यंत सुंदर प्रस्तुति,…साभार

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 9, 2013

    मान्यवर के.पी. सिंह जी , सादर अभिवादन !……..प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! पुनश्च !!

March 3, 2013

बहुत अच्छी प्रस्तुति आचार्य जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 5, 2013

    मान्य भाई सुधीर जी , नमस्कार ! सुन्दर सराह्नार्थ आभारी हूँ ! पुनश्च !!

deepasingh के द्वारा
March 3, 2013

सुन्दर कृति आदरणीय आचार्य जी.वन्देमातरम. http://deepasingh.jagranjunction.com

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 9, 2013

    दीपा जी , सादर !….. सराहनार्थ आभारी हूँ ! सहयोग व सम्बन्ध बनाए रखें !

Shweta के द्वारा
March 1, 2013

बहुत ही सुन्दर रचना है …….

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 1, 2013

    श्वेता जी ! हार्दिक आभार ! मेरे ब्लॊग पर आप का स्वागत है , विचारों के आदान-प्रदान का क्रम बना रहे ! सधन्यवाद !!

yogi sarswat के द्वारा
February 26, 2013

ऋतुराज बसंत का आगमन हो चुका है ,आपकी सुन्दर रचना भी एक लंबे समय बाद मंह पर है.बधाई आपको

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 27, 2013

    मान्य योगी जी, सादर !……..प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !!

seemakanwal के द्वारा
February 24, 2013

बहुत सुन्दर बासंती रचना . हार्दिक आभार .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 25, 2013

    मान्या सीमा जी ; सादर !……हार्दिकता के लिए हार्दिक आभार !!

akraktale के द्वारा
February 23, 2013

आदरणीय आचार्य जी सादर, बसंत के आगमन पर स्वागत करती मधुर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 25, 2013

    आदरणीय भाई रक्तले जी , सादर अभिवादन !….. आप की सहमति युक्त प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ !! सधन्यवाद !1

Alka के द्वारा
February 22, 2013

आदरणीय आचार्य जी , मधुमास का स्वागत करती बहुत सुन्दर रचना | हो गए सुरभित अवनि के रंग , आगया गुंजार का मौसम ………

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 25, 2013

    आदरणीया अलका जी, सादर !………सुन्दर प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ !पुनश्च !!

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 22, 2013

मान्या अलका जी, नमस्कार ! मेरे ब्लौग पर आप का हार्दिक स्वागत है साथ ही सुन्दर मंतव्य के लिए आभार भी !

alkargupta1 के द्वारा
February 22, 2013

आचार्य जी , मधुमास का अति सुन्दर चित्रण किया है मनभावन कृति !

krishnashri के द्वारा
February 22, 2013

आदरणीय आचार्य जी , सादर , बहुत सुन्दर पंक्तियाँ मधुमास के स्वागत में , बधाई .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 25, 2013

    आदरणीय मान्यवर , सादर नमन !…….आप की सद्भावना के लिए आभारी हूँ !! पुनश्च !!

omdikshit के द्वारा
February 21, 2013

आचार्य जी ,नमस्कार. बहुत सुन्दर चित्रण.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 21, 2013

    आदरणीय ओम दीक्षित जी , साभिवादन !………..हार्दिकता हेतु आभारी हूँ ! कृपा बनाए रखें ! सधन्यवाद !!

Ravinder kumar के द्वारा
February 21, 2013

गुंजन जी, सादर नमस्कार . सुंदर चित्र के लिए बधाई. कविता के शब्द , भाव बहुत सुंदर. बेहतरीन कविता के लिए आप को बधाई.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 21, 2013

    मान्य रविंदर जी , नमस्कार !……..सुन्दर सराहना के लिए आभारी हूँ ! कृपा बनाए रखें ! सधन्यवाद !!

yatindrapandey के द्वारा
February 20, 2013

हैलो सर आपकी ये लेखनी मेरे दिल को छू गयी है बेहद सुन्दर

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 20, 2013

    यतीन्द्र जी ! आप का बहुत-बहुत आभार ! स्वागत है आप का मेरे ब्लौग पर !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 20, 2013

    शालिनी जी , सादर !….सुन्दर प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! पुनश्च !

Santlal Karun के द्वारा
February 20, 2013

आदरणीय गुंजन जी, लगता है कान में मधुमास के गीत का स्वर पड़ते ही आप ने भी अकथ का इजहार करने ‘मनुहार’ की राह पकड़ ली है | आप के इस गीत पर महादेवी की यह पंक्तियाँ याद हो आईं — “निशा की धो देता राकेश चाँदनी में जब अलकें खोल कली से कहता था मधुमास बता दो मधु मदिरा का मोल |” मधुमास के आगमन पर आप के मधुर गीत के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 20, 2013

    श्रद्धेय करुण जी, सादर नमन !….मनोरम भावनाओं से पगी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! सहयोग देते रहें ! पुनश्च !!

ajay kumar pandey के द्वारा
February 20, 2013

आदरणीय आचार्य जी मंच पर आने में देरी के लिए शमा करें क्योंकि आजकल इस मंच पर आने का समय कम है क्योंकि में बोर्ड की तैयारी में हूँ आपकी कविता अच्छी लगी आप मेरे ब्लॉग पर जरुर आईयेगा मेरी यह रचना भी देखिएगा महाकुम्भ आखिर इस हादसे का जिम्मेदार कौन धन्यवाद

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 20, 2013

    स्नेहिल अजय जी , सप्रेम !…….प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! जो आप कर रहे हैं , अभी वही ज़रूरी है ! महाकुम्भ का हाल जानने अवश्य आउंगा !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 20, 2013

आदरणीय आचार्य जी, सादर ! बहुत दिनों बाद आपकी उपस्थिति हुई, और एक सुन्दर रचना के साथ हुई ! “”अकथ के इज़हार का मौसम ! वीथिका में उठी आज उमंग , कौन है जिसके न संग अनंग | आ गया उपहार का मौसम !”" बहुत सुन्दर ! अब तो फागुन तक सभी उमंग में ही रहेंगे ! सादर !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरणीय बड़े भाई , सादर नमन !….कुछ तो मजबूरियाँ रहीं होंगी ,यों कोई बेवफा नहीं होता ! अब मंच पर बने रहने की इच्छा है ! आप के आशीष से बल मिला ! अनुगृहीत हूँ !

nishamittal के द्वारा
February 19, 2013

ऋतुराज बसंत का आगमन हो चुका है ,आपकी सुन्दर रचना भी एक लंबे समय बाद मंह पर है.बधाई आपको

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 19, 2013

    श्रद्धेया निशा जी, सादर अभिवादन ! अंतराल बाद मंच पर आया हूँ ! अब यहाँ बना रहूँगा | हार्दिक आभार !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 19, 2013

सुन्दर मौसम सुन्दर रचना ह्रदय के भाव नाच मन अपना जय हो. आदरणीय आचार्य जी, सदर अभिवादन

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 19, 2013

    आदरेय प्रदीप जी, सादर नमन ! …. आशीष – पुष्प के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !!

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
February 18, 2013

ह्रृदय में होने लगी हलचल ! अकथ के इज़हार का मौसम ! वीथिका में उठी आज उमंग , कौन है जिसके न संग अनंग | क्या बात है आचार्य जी ….वासंती ने जमा दिया रंग ….खूबसूरत कोमल भाव …मन खुश हो गया …. भ्रमर ५

    jlsingh के द्वारा
    February 19, 2013

    उपर्युक्त पंक्तियाँ ही मैं भी रेखांकित करना चाहता था! जब महादेव और विश्वामित्र भी इस अनंग के जाल में फंस चुके हैं तो आम जन की बात कौन करे! सचमुच -आ गया श्रृंगार का मौसम ! फिर धरा सजने लगी ऐसे अनकही कुछ बात हो जैसे आ गया फिर प्यार का मौसम ! फिर खिले टटके सुनहले रंग, हो गए सुरभित अवनि के अंग | बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है आपने प्रकृति का! और बसंत ऋतू का!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 19, 2013

    मान्य भ्रमर जी , सादर !..सराहना के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 19, 2013

    मान्यवर जबाहर लाल सिंह जी, सादर अभिवादन !……..मनभावन और वासंती रंग में रँगी सुन्दर सद्भावना के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !


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