kavita

meri bhavnaon ka sangrah

66 Posts

1656 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9493 postid : 172

दहशत का पहरा है

Posted On: 10 Mar, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

फेक रहे बार-बार
जाल कई
भावों के !
पकड़ नहीं पाते पर
दर्द आज
घावों के !!
लिखना जो चाह रहा
लिखा नहीं
जाता है
धुंध बना चिंतन के
पट पर
लहराता है
ओर-अंत लिखने हैं
थकन भरे
पाँवों के !!
सूख गई पीड़ा जो
आँसू बन
आँखों में
तड़प रहीं इच्छाएँ
उड़ने की
पाँखों में
दर्द अब असह्य हुए
अनगिनत
अभावों के !!
दहशत का पहरा है
पीपल के
पेड़ तले
बरगद के नीचे में
अनगिन
षड़यंत्र पले
किस्से हैं पीर भरे
पोर- पोर
छाँवों के !!
फेक रहे बार-बार
जाल कई
भावों के !
पकड़ नहीं पाते पर
दर्द आज
घावों के !!
-आचार्य विजय गुंजन

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

42 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
January 8, 2014

धुंध बना चिंतन के पट पर लहराता है…..! सुन्दर शब्द, बधाई! आचार्य जी!

yamunapathak के द्वारा
April 30, 2013

गुंजन जी आपकी कविता के gunthe हुए शब्द और उनकी तारतम्यता बहुत अच्छी लगती hai. साभार

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    May 3, 2013

    आदरणीया यमुना जी , सादर ! आप की प्रतिक्रिया अच्छी लगी ! हार्दिक आभार ! आजकल मेरा संगणक में खराबी आ गई है ! अतः कम लिखना हो रहा है !

akraktale के द्वारा
March 24, 2013

सुन्दर रचना आदरणीय आचार्य जी.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 27, 2013

    मान्य भाई रक्तले जी , नमस्कार !………हार्दिक आभार सह होली की समस्त मंगल कामनाओं के साथ ! पुनश्च !

Alka के द्वारा
March 21, 2013

आदरणीय आचार्य जी , सुन्दर भावपूर्ण रचना | आपको होली की शुभ कामनाये ……

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 21, 2013

    मान्या अलका जी, सादर !……..प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! आप को भी होली की अशेष शुभकामनाएं !

ajay kumar pandey के द्वारा
March 19, 2013

आदरणीय आचार्य जी नमन सबसे पहले देरी से आने के लिए शमा करें में बोर्ड परीक्षा के कारण आपके ब्लॉग पर नहीं आ रहा था आपकी कविताएँ मुझे बहुत पसंद हैं आपकी यह रचना मैंने दैनिक जागरण में भी पढ़ी अच्छी लगी आज पूरी पढ़ी तो और भी अच्छी लगी आप मेरा लेख महाकुम्भ स्नान और भ्रमण के अनुभव जरुर देखें और अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया जरुर दें मेरे ब्लॉग पर आकर आपकी हर प्रतिक्रिया का मेरे लिए बहुत महत्व है धन्यवाद अजय कुमार पाण्डेय

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 20, 2013

    अजय जी , सस्नेह !…… हाँ, अब बोर्ड परीक्षाएँ समाप्त हो चुकी हैं ! अब आप परीक्षा-फल के इन्तजार तक खूब लिखिए-पढ़िए ! प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! पुनश्च !!

alkargupta1 के द्वारा
March 19, 2013

“षड़यंत्र पले किस्से हैं पीर भरे पोर- पोर छाँवों के !! फेक रहे बार-बार जाल कई भावों के ! पकड़ नहीं पाते पर दर्द आज घावों के !!” आचार्य जी , बहुत ही बढ़िया पंक्तियाँ उत्कृष्ट भावाभिव्यक्ति

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 19, 2013

    मान्या अलका जी, सादर !…………. आप की हार्दिकता प्राप्त कर अनुगृहीत हूँ ! पुनश्च !! ,

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 19, 2013

सूख गई पीड़ा जो आँसू बन आँखों में तड़प रहीं इच्छाएँ उड़ने की पाँखों में दर्द अब असह्य हुए अनगिनत अभावों के !! दहशत का पहरा है आदरणीया आचार्य जी सादर अभिवादन शब्द नहीं कहने को दहशत का पहरा है वाह सर जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 19, 2013

    आदरणीय कुशवाहा जी , सादर प्रणतिः !……. आप की बहुमूल्य प्रतिक्रया से उत्साहित हुआ हार्दिक आभार !!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    आदरणीय मान्यवर , सादर अभिवादन !….. आप की हार्दिकता प्राप्त कर उत्कंठित हूँ ! मेरे ब्लॊग पर आप का हार्दिक स्वागत है ! आभार सहित !! पुनश्च !

yogi sarswat के द्वारा
March 13, 2013

दहशत का पहरा है पीपल के पेड़ तले बरगद के नीचे में अनगिन षड़यंत्र पले किस्से हैं पीर भरे पोर- पोर छाँवों के !! बहुत बहुत सुन्दर भाव और शब्द श्री आचार्य जी ! आपकी पोस्ट प्रकाशित भी हुई , बधाई

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 16, 2013

    मान्य भाई योगी सारस्वत जी , सादर अभिवादन !…… आप के सूचनोपरांत मै ने प्राकाशित post को देखा ! हार्दिक आभार !

omdikshit के द्वारा
March 13, 2013

आचार्य जी , नमस्कार . बहुत ही गहरे – पैठ बनाती रचना .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 16, 2013

    aadarneey om dikshit jee, saadar abhivaadan !…… protsaahan ke liye haardik aabhaar !

aman kumar के द्वारा
March 13, 2013

आपको प्रणाम ! आज के दैनिक जागरण में आपकी कविता देखकर बहुत खुशी हुई! आपको बहुत बहुत बधाई !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    स्नेहिल अमन जी , सप्रेम नमस्कार !……हार्दिक धन्यवाद ! sampark banaae rakhen !

jlsingh के द्वारा
March 13, 2013

आदरणीय आचार्य जी, सादर अभिवादन! आपकी इस रचना के प्रमुख अंश आज के दैनिक जागरण में देखकर बहुत खुशी हुई! आप को बहुत बहुत बधाई!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    मानवर जे. एल . सिंह जी, सादर नमन !…… उत्साहबर्धक प्रतिक्रया ke liye आभारी हूँ ! पुनश्च !!

shalinikaushik के द्वारा
March 12, 2013

bahut bhavnatmak kintu yatharth par aadharit sarthak abhivyakti.badhai

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    शालिनी जी , सादर !…….. उत्साहजनक टिप्पणी के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !!

March 12, 2013

क्षमा करेंगे आचार्य जी , कुछ गलती लिखा गया ।

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    वस्तुतः यह आंग्लभाषा की वर्तनी का दोष है ! आप बिलकुल आश्वश्त रहें ! धन्यवाद !

March 12, 2013

दहशत का पहरा है पीपल के पेड़ तले बरगद के नीचे में अनगिन षड़यंत्र पले किस्से हैं पीर भरे पोर- पोर छाँवों के !!बहुत अच्छी रचना आचार्या गुंजन जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    मान्य सुधीर जी, सादर !……. अच्छी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद ! पुनश्च !!

yamunapathak के द्वारा
March 12, 2013

gunjan jee behad sundar panktiyaan hain. sabhar

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    मान्या यमुना जी, सादर !….हार्दिकता के लिए आभारी हूँ !

shashi bhushan के द्वारा
March 11, 2013

आदरणीय आचार्य जी, सादर ! एक अत्यंत सुन्दर, सामयिक, जनमानस के दर्द को उकेरती प्रवाहमयी रचना के लिए हार्दिक बधाई ! “”किस्से हैं पीर भरे, पोर- पोर, छाँवों के !! फेक रहे बार-बार, जाल कई भावों के ! पकड़ नहीं पाते पर दर्द आज घावों के !!”" बहुत सुन्दर !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    श्रद्धेय वर , सादर प्रणाम !……. उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में व्यस्त रहने के कारण विलम्ब से पोस्ट को देख रहा हूँ , तदर्थ क्षमाप्रार्थी हूँ ! आप की प्रतिक्रिया तो सदैव मेरे लिए संजीवनी का काम करती है !आभार सहित !!

graceluv के द्वारा
March 11, 2013

Hello Dear! My name is Grace, I saw your profile and would like to get in touch with you If you’re interested in me too then please send me a message as quickly as possible. (gracevaye22@hotmail.com) Greetings Grace

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    ग्रेस जी , सप्रेम नमस्कार ! सुन्दर -सुन्दर शब्दों में पिरोई इस प्यारी सी प्रतिक्रया के लिए आभारी हूँ ! साथ ही मेरे ब्लॊग पर आप का सदैव swagat hai !

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
March 10, 2013

तड़प रहीं इच्छाएँ उड़ने की पाँखों में दर्द अब असह्य हुए अनगिनत अभावों के !! दहशत का पहरा है पीपल के पेड़ तले बरगद के नीचे में अनगिन षड़यंत्र पले किस्से हैं पीर भरे पोर- पोर छाँवों के !! आचार्य जी…….अत्यंत भावपूर्ण ………..साभार

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    मान्यवर के.पी. सिंह जी , सादर अभिवादन !….. आप की उत्साहवर्धक प्रतिक्रया ने मनोवल को बढ़ाया ! बहुत-बहुत आभार ! पुनश्च !!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    मान्यवर के.पी.सिंह जी, साभिवादन ! आप की प्रतिक्रिया से उत्साह बढ़ा ! haardik aabhaar !

jlsingh के द्वारा
March 10, 2013

लिखना जो चाह रहा लिखा नहीं जाता है धुंध बना चिंतन के पट पर लहराता है. क्या कहें आचार्य जी, सादर अभिवादन! आपने एक एक शब्द बहुत ही नाप तौल कर रखे हैं! क्या कहूं मौन हूँ, मन बड़ा घबराता है! आभार सहित!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 18, 2013

    आदरणीय भाई , साभिवादन !….मौन तो तोड़ना ही पड़ेगा क्यों कि आप के मुखर होने में संसार का कल्याण छुपा है ! आभार सहित !!

nishamittal के द्वारा
March 10, 2013

आचार्य जी सुन्दर भावों से परिपूर्ण रचना लिखना जो चाह रहा लिखा नहीं जाता है धुंध बना चिंतन के पट पर लहराता है

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 10, 2013

    मान्या निशा जी , साभिवादन !……सद्भावना हेतु आभारी हूँ ! सादर !


topic of the week



latest from jagran