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चुटीली कुण्डलिया

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एक
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” जनता दल यू ” ने भरी ऊँची आज उड़ान ,
राजनीति के व्योम में ताने तीर- कमान !
ताने- तीर कमान कमल- दल को भेदेंगे
मंडराते भँवरों को उड़ा- उड़ा खेदेंगे !
कह गुंजन जाकर “मनेर ” मानेंगे मनता
देख- देख मन ही मन मुस्कायेगी जनता !

दो
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मनमोहन के फाँस में फँसे आज नीतीश ,
चीख- चीख कर उगलते मोदी मन की खीस !
मोदी मन की खीस स्वयं को तौल रहे हैं
अन्दर ही अन्दर गुस्से से खौल रहे हैं !
कह गुंजन छाया सिर पर कैसा सम्मोहन
मन ही मन हैं मुस्की मार रहे मनमोहन !

तीन
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धोखा मिला बिहार में , राजनाथ बेचैन ,
नींद उड़ गई नैन की काटे कटे न रैन !
काटे कटे न रैन “घात ” की काट खोजते ,
चूक हुई क्या , मंथन कर- कर मन टटोलते !
कह गुंजन कवि इंद्रजाल था वह पनशोखा,
ऐसे में खाना ही था आँखों को धोखा !

चार
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लालू जी हैं सो गए डाल कान में तेल ,
लड़ो-मरो काटो-कटो मुझे देखना खेल !
मुझे देखना खेल चले थे दोस्त बनाने ,
गिरे धराशाई होकर चित चारों खाने ,
कह गुंजन बनते फिरते थे बडका चालू ,
कुछ भी कर लो टस से मस न हिलेगा लालू !

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

manoranjanthakur के द्वारा
June 29, 2013

यु ही लेते रहे बिहार ki खॆर लालू ..नितीश …सुसील मॊज करे जनता रहे बॆचॆन… बहुत बधाई

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 30, 2013

    मनोरंजन जी , नमस्कार !…. प्रतिक्रया के लिए आभारी हूँ ! शेष फिर !!

seemakanwal के द्वारा
June 27, 2013

mzedar रचना .हार्दिक आभार .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 30, 2013

    मान्या सीमा जी , सादर अभिवादन ! सम्मत्यर्थ आभारी हूँ ! पुनश्च !

omdikshit के द्वारा
June 26, 2013

आचार्य जी,नमस्कार. आज की राजनीति को भेदती सुन्दर कुण्डलियाँ.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 30, 2013

    मान्यवर ओम दीक्षित जी, सादर अभिवादन !……बहुत दिनों बाद मुलाक़ात हो रही है ! सदाशयता के लिए हार्दिक आभार ! पुनश्च !

alkargupta1 के द्वारा
June 26, 2013

राजनैतिक व्यवस्था पर बड़ा ही अच्छा प्रहार किया है .आपकी चुटकी लेती हुई चुटीली कुण्डलियाँ पढ़ कर बड़ा ही आनंद आया आचार्य जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 30, 2013

    aadarneeyaa alkaa jee, saadar अभिवादन !… उत्साह्बर्धन हेतु aabhaaree hoon ! kripaa banaae rakhen !

yogi sarswat के द्वारा
June 26, 2013

धोखा मिला बिहार में , राजनाथ बेचैन , नींद उड़ गई नैन की काटे कटे न रैन ! काटे कटे न रैन “घात ” की काट खोजते , चूक हुई क्या , मंथन कर- कर मन टटोलते ! कह गुंजन कवि इंद्रजाल था वह पनशोखा, ऐसे में खाना ही था आँखों को धोखा ! राजनीतिक हालात पर एकदम सटीक और तीखा व्यंग्य ! बहुत सुन्दर श्री आचार्य जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 30, 2013

    भाई योगी , सादर !… हार्दिक आभार ! सहयोग व सम्बन्ध बनाए रखें !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 25, 2013

आदरणीय गुंजन जी भंवरे को खेदने चले तो हम भी उड़ आये …..गुंजन कर जगायेंगे दिल की हाल सुनायेंगे …बड़ी मित्रता देखी हमने भी उधर माया की इधर नितीश की ,,,सब मौका परस्त …. जबरदस्त कटाक्ष करती और सटीक हालत दिखाती कुण्डलियाँ ….आनंद आया भ्रमर ५

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 30, 2013

    मान्य भाई भ्रमर जी, साभिवादन !आप की धारदार प्रतिक्रया का आभारी हूँ ! बस इसी तरह कृपा बरसाते रहें !हार्दिक आभार !

priti के द्वारा
June 25, 2013

वाकई बहुत ही चुटीली कुण्डलियाँ हैं ,पढ़ कर मज़ा आ गया ……..सटीक और धारदार रचना के लिए हार्दिक बधाई ! आदरणीय आचार्य जी ……..

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 30, 2013

    मान्या प्रीति जी, सादर !……आप की प्रतिक्रया से उत्साह बर्धन हुआ ! हार्दिक आभार ! पुनश्च !!

jlsingh के द्वारा
June 25, 2013

राज नाथ कहते हुई क्या हमसे गलती मोदी पाए कमान भला ये है क्या गलती! कमल फूल आसीन पानी बनता है मोती गिरे कमल से नीचे तब तो पूछ न होती! बाली वीर हो सम्मुख,आधा बल ले जाता! होगा उनका बद हाल, न कुछ मेरा जाता! आदरणीय आचार्य जी कुछ पंक्तियाँ जोड़ने की कोशिश की है, आशीष दीजियेगा!सादर!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 29, 2013

    आदरणीय भाई जे.एल. सिंह जी, सादर अभिवादन !…. पंक्तियाँ अच्छी लगीं | इसी तरह व्यंग्य के गोले दागते रहिये ताकि इन लूटेरों को कुछ तो लाज लगे ! सधन्यवाद !

nishamittal के द्वारा
June 23, 2013

चुटीली ,कंटीली कुंडलियों की प्रस्तुति बहुत अच्छी लगी आचार्य जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 23, 2013

    श्रद्धेया निशा जी , सादर प्रणतिः ! आभारी हूँ !

harirawat के द्वारा
June 23, 2013

आचार्या जी आप मेरे ब्लाक में आए पंखुड़ी सुमन चढ़ाए, धन्यवाद देता हूँ हौसला अफजाई करने के लिए ! आपकी कुण्डलियाँ ज्यों नाविक के तीर, देखने में छोटे लगे घाव करे गंभीर ! अति सुन्दर ! साधुवाद ! हरेन्द्र जागते रहो !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 23, 2013

    श्रद्धेय रावत जी , सादर !….उत्साह बढ़ाने के लिए आभारी हूँ ! हार्दिक धन्यवाद !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 23, 2013

    शालिनी जी , स्नेहिल नमन ! प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! सधन्यवाद !


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