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मन में अनगिन कोमल भाव सँवरने लगते ( कांटेस्ट )

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मन में रीतापन भरता है
यह उदास दिन !

पता नहीं क्या-क्या होता है
अंदर-अंदर,
अन्यास भावों के उठते
सात समुन्दर |

हो जाता तब पलभर में ही
ख़ास-ख़ास दिन ! मन में रीतापन ………

चिंतन-पट जब धीरे-धीरे
लगता खुलने ,
स्वयं कल्पनाओं की लगती
साँकल हिलने |

तब लगता है कितना सुन्दर
पास-पास दिन ! मन में रीतापन …………….

कई दूधिये रंग फूल के
तरने लगते ,
मन में अनगिन कोमल भाव
सँवरने लगते |

पसर आँख में जाता खिलकर
काँस-काँस दिन !
मन में रीतापन भरता है
यह उदास दिन !!
आचार्य विजय ” गुंजन “

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
November 28, 2013

bahut sundar bhavon kee abhivyakti .aabhar

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 29, 2013

    धन्यवाद शिखा जी ! पुनश्च !!

meenakshi के द्वारा
November 28, 2013

गहन भाव भरी सुन्दर रचना , आचार्य विजय ” गुंजन “ अनेक २ शुभकामनाएं . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 28, 2013

    मान्या मीनाक्षी जी , सादर अभिवादन ! शुभकामनाओं व सुन्दर सराहना के लिए हार्दिक आभार ! पुनश्च !!

ranjanagupta के द्वारा
November 28, 2013

आचार्य विजय जी !सुन्दर कविता भावभरी !बहुत बधाई !!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 28, 2013

    आभारी हूँ रंजना जी ! पुनश्च !

deepakbijnory के द्वारा
November 27, 2013

कमाल कि रचना आदरणीय विजय जी चिंतन-पट जब धीरे-धीरे लगता खुलने , स्वयं कल्पनाओं की लगती साँकल हिलने | तब लगता है कितना सुन्दर पास-पास दिन ! मन में रीतापन

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 28, 2013

    आदरणीय श्रद्धेय वर दीप जी आभारी हूँ ! पुनश्च !!

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 27, 2013

विचारणीय महत्वपूर्ण प्रस्तुति सादर

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 27, 2013

    यतीन्द्र जी ! हार्दिक धन्यवाद ! कृपा बनाए रखें ! पुनश्च !

Bhagwan Babu 'Shajar' के द्वारा
November 26, 2013
    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 26, 2013

    मान्यवर भगवान बाबू ” शजर” जी, सादर अभिवादन ! उत्साहवर्धन के लिए आभारी हूँ | पुनश्च !!

yogi sarswat के द्वारा
November 26, 2013

कई दूधिये रंग फूल के तरने लगते , मन में अनगिन कोमल भाव सँवरने लगते | पसर आँख में जाता खिलकर काँस-काँस दिन ! मन में रीतापन भरता है यह उदास दिन !! जिंदगी के रंगों में पिरोई हुई बहुत सुन्दर रचना श्री आचार्य गुंजन जी !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 26, 2013

    मान्य भाई yogee जी, saabhivaadan ! सुन्दर सम्मति ke lie aabhaaree हूँ ! सम्बन्ध बना रहे यही कामना है ! शेष पुनः !

sadguruji के द्वारा
November 24, 2013

आदरणीय आचार्य विजय ” गुंजन आप की कविता अच्छी लगी,बधाई.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 25, 2013

    श्रद्धेय सद्गुरु जी , सादर वंदे ! हार्दिकता प्राप्त कर हर्षित हूँ ! साभार !!

dineshaastik के द्वारा
November 24, 2013

आदरणीय गुंजन जी। नमस्कार। बहुत ही सुन्दर कविता की प्रस्तुति के लिये बधाई।

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 24, 2013

    आदरणीय आस्तिक जी, सादर अभिवादन !काफी दिनों तक आप अनुपस्थति खलती रही aaj man badaa ही प्रसन्न हो उठा यों कहें कि खिल उठा | haardik aabhaar !

seemakanwal के द्वारा
November 23, 2013

बहुत खूबसूरत रचना .आभार .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 24, 2013

    सीमा जी ! हार्दिक आभार ! पुनश्च !

jlsingh के द्वारा
November 23, 2013

बहुत हे सुन्दर शब्दों में पिरोई गयी भावपूर्ण अभिव्यक्ति! आदरणीय आचार्य गुंजन जी! बधाई! कई दूधिये रंग फूल के तरने लगते , मन में अनगिन कोमल भाव सँवरने लगते | पसर आँख में जाता खिलकर काँस-काँस दिन !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 24, 2013

    आदरणीय भाई जबाहर लाल सिंह जी, सादर अभिवादन ! आप की हार्दिकता पाकर ह्रदय खिल उठा ! आभार !

sanjay kumar garg के द्वारा
November 23, 2013

“मन में रीतापन भरता है” सुन्दर अभियक्ति के लिए बधाई! विजय जी!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 23, 2013

    हार्दिक आभार संजय जी ! सहयोग व सम्बन्ध बनाए रखें !पुनश्च !

ranjanagupta के द्वारा
November 23, 2013

बहुत सुन्दर ,,काव्यत्व का अच्छा परिपाक !बधाई!!अच्छी रचना भी है और भाव भी!!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 23, 2013

    रंजना जी ! आप का पुनः आभार !!

ranjanagupta के द्वारा
November 23, 2013

बहुत सुन्दर ,,काव्यत्व का अच्छा परिपाक !बधाई!!!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 23, 2013

    मान्या रंजना जी, सादर ! रचना आप को अच्छी लगी एतदर्थ आभारी हूँ ! पारस्परिक सहयोग व सम्बन्ध तथा विचारों का आदान-प्रदान बनाएं रखें ! सधन्यवाद !!

nishamittal के द्वारा
November 23, 2013

बहुत खूबसूरत रचना आचार्य जी आपको बधाई

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    November 23, 2013

    श्रद्धेया निशा जी, सादर प्रणतिः !आप की शुभकामना ही हमारा सम्बल है ! हार्दिक आभार !!


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