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" आप " और हम सब मिलकर .............

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NSP_8129aसुनो – सुनो दुनियावालो ! इतिहास बदलनेवाला है !
भारत के जन-गण-मन का अब भाग्य सँवरनेवाला है !!

राजनीति कठपुतली बन बैठी उन कर – उचक्कों की थी
राहजनी – तस्करी – गबन – सौदा करने में पक्कों की थी

बेईमानों का भाई अब ह्रदय दहलनेवाला है !
सुनो- सुनो दुनियावालो!इतिहास बदलनेवाला है !!

घोटाले पर घोटाले कर चूस देश को घोंट गए ये
कदाचार के सोंटों से जन-गण-मानस को सोंट गए ये

झोपड़ियों के उठे क्रोध से गढ़ अब ढहनेवाला है !
सुनो- सुनो दुनियावालो ! इतिहास बदलनेवाला है !!

गद्दारों ने लूट-लूटकर किस बिल में धन है रख डाला
ऊपर से ये हंस सरीखे अंदर से इनका मन काला

झूठे वादों से जन-गण अब नहीं बहलनेवाला है !
सुनो-सुनो दुनियावालो ! इतिहास बदलनेवाला है !!

होता था हो रहा अभी भी द्रौपदियों का शील – हरण
भारत की ललनाओं का पग-पग पर होता रहा मरण

व्याध सभी भागेंगे फिर अब चमन चहकनेवाला है !
सुनो – सुनो ……………………………………………..!!

बहुत हो गई नहीं चलेगी धन्नाओं की अब मनमानी
बेनक़ाब होंगे बगुले ये उतरेगा अब इनका पानी

दीन-हीन जन का कुटीर अब नहीं उजड़नेवाला है !
सुनो -सुनो …………………………………………….!!

” आप ” और हम सब मिलकर अब धरती का श्रृंगार करेंगे
रची-बसी आबादी की संरचनाओं से प्यार करेंगे

भरी फसल से खेतों में खलिहान मचलनेवाला है !
सुनो – सुनो दुनियावालो!इतिहास बदलनेवाला है !!
आचार्य विजय गुंजन”

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
January 9, 2014

भावनाएं और शब्द प्रभावित करते हैं किन्तु लोगों के चालचलन ड्रामेबाजी से निराश कर रहे हैं ! उम्मीद अच्छे कि करनी चाहिए आचार्य जी !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 9, 2014

    भाई योगी जी ! आजकल अच्छाई विरल है ऐसे में थोड़ा भी मिल जाने पर यह भावुक मन उल्लसित और उत्साहित हो जाता है ! हार्दिक धयवाद !1

yamunapathak के द्वारा
January 7, 2014

गुन्जन जी वाकई बहुत प्रेरक और हुंकार भरती कविता है……परिवर्तन अपेक्षित था…आजादी परिपक्वता की उम्र से भी आगे बढ़ चुकी थी. साभार

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 9, 2014

    हार्दिक धन्यवाद यमुना जी ! आप की सहमति अपेक्षित थी ! सादर !

santkumarsharma के द्वारा
January 5, 2014

सुंदर अभिव्यक्ति परंतु कुछ भी कहना जल्दबाज़ी ही होगी काश आप और हम सही हों।

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 5, 2014

    मान्य संत कुमार शर्मा जी, सादर !…सर्वप्रथम मेरे ब्लॉग पर आप हार्दिक स्वागत है ! प्रतिक्रिया अच्छी लगी , आप ने सही कहा अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी ! साभार !1

aman kumar के द्वारा
January 5, 2014

” आप ” और हम सब मिलकर अब धरती का श्रृंगार करेंगे रची-बसी आबादी की संरचनाओं से प्यार करेंगे… अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी होंगी …….. पर आपकी भावना का सम्मान करता हु आभार

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 5, 2014

    अमन जी ! हार्दिक धन्यवाद ! आगे-आगे देखिए होता है क्या ?

January 2, 2014

हार्दिक आभार, सर! यह बहर क्या होता है? कृपया मार्गदर्शन करें………………………………..

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 3, 2014

    अनील जी , सप्रेम नमस्कार ! विस्तार से आप के ब्लॉग में लिखना बेतार होगा अतः आ रहा हूँ !

RAHUL YADAV के द्वारा
January 2, 2014

जाग उठी अब कलम  आप… की सौभग्य बदलने वाला है ….. सही कहा आचार्य जी अब भाग्य बदलने वाला है ।    …… सार्थक रचना आचार्य जी  । 

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 2, 2014

    राहुल जी ! हार्दिक धन्यवाद ! नव वर्ष की समस्त मंगल कामनाओं के साथ ! नए साल में मिलजुलकर हम कुछ तो नया करें !!

ranjanagupta के द्वारा
January 2, 2014

बहुत सुन्दर !काश ऐसा हो जाये आचार्य जी ,लोकमानस कबसे प्रतीक्षा रत है !अपडेट करने के बाद भावो में और भी प्रखरता आ गई !!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 2, 2014

    आदरणीया रंजना जी , साभिवादन !… पुनराभार !!

ranjanagupta के द्वारा
January 2, 2014

आचार्य जी !बहुत सुन्दर !शब्दों की जादूगरी !बहुत बधाई !!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 2, 2014

    मान्या रंजना जी , सादर अभिवादन ! रचना आप को अच्छी लगी , आभारी हूँ ! एक-दो मुद्रण की त्रूटि को सुधारकर पुनः अपडेट करना पड़ा है , देखेंगी ! साभार !

sadguruji के द्वारा
January 1, 2014

बहुत अच्छी रचना.बधाई.आचार्याजी अंग्रेजी नववर्ष आपके लिए और आपके परिवार के लिए मंगलमय हो.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 1, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी , सादर !…. प्रतिक्रियार्थ व नव वर्ष की मंगल कामना के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !1

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
December 31, 2013

नव वर्ष २०१४ की बहुत बहुत शुभकामनाएं .

December 31, 2013

सुनो – सुनो दुनियावालो ! इतिहास बदलनेवाला है ! भारत के जन-गण-मन का अब भाग्य सँवरनेवाला है !! राजनीति कठपुतली बन बैठी उन कर – उचक्कों की थी राहजनी – तस्करी – गबन – सौदा करने में पक्कों की थी बेईमानों का भाई अब ह्रदय दहलनेवाला है ……………………………………………नव जागरण का स्वागत करती रचना………………………..बहुत खूब……………….

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 1, 2014

    मान्य अलीन जी, नमस्कार !उत्साह बढ़ाती प्रतिक्रया के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !

jlsingh के द्वारा
December 30, 2013

” आप ” और हम सब मिलकर अब धरती का श्रृंगार करेंगे रची-बसी आबादी की संरचनाओं से प्यार करेंगे भरी फसल से खेतों में खलिहान मचलनेवाला है ! सुनो – सुनो दुनियावालो!इतिहास बदलनेवाला है !! यह सब देख सुन मन अब गद गद होने वाला है …. आदरणीय आचार्य विजय कुमार गुंजन जी! हार्दिक बधाई!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 1, 2014

    मान्य जे.एल. सिंह जी, साभिवादन ! हार्दिक धन्यवाद साथ ही नव वर्ष मंगल कामनाएं भी !!

December 30, 2013

ऐसा हो ही जाना चाहिए .सार्थक अभिव्यक्ति .आपको नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    December 30, 2013

    शालिनी जी, सादर ! प्रतिक्रिया अच्छी लगी | हार्दिक आभार ! आप को भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !


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