kavita

meri bhavnaon ka sangrah

66 Posts

1656 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9493 postid : 681406

" तभी तो विस्फोट करता है शब्द " ( कांटेस्ट )

Posted On: 5 Jan, 2014 Others,कविता,Contest में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

volcano4505369452_8a7c5f69d0 भावों के चक्रव्यूह में
उलझा मेरा मन
टोहता है अर्थवाही उन शब्दों को
जो पहुंचा दे उसे
उस मंजिल तक
जहाँ से खुलता है कविता का द्वार
उसके अंतस् के धुंध के
घने और गहरे आवरण को चीरकर .
शब्द जो अविनाशी अक्षरों का
समाहार होता है
कई स्पर्श – अन्तस्थ और उष्मों का
अस्तित्व समाहित होता है
उसकी काया में
तभी तो विस्फोट करता है शब्द .
सचमुच अक्षरों की सारी अक्षुण्ण संजीवनी
संचरित होती है शब्दों में
यदि शब्द आज ब्रह्म है
तो इसका सारा श्रेय
उन अक्षरों को जाता है
जिनसे उनका निर्माण हुआ है
अगर शब्द आज सुरक्षित है
तो चमत्कार है उन अक्षरों का
जो कवच बनकर एकाकार हैं
उनकी काया में .
अपना सारा अस्तित्व समर्पित कर दिया है अक्षरो ने
शब्दों के नाम .
अब कुछ नहीं है उनका
सबकुछ शब्दों का है
क्यों कि शब्द ब्रह्म होता है
अब वे नहीं बोलेंगे
बोलेगा केवल शब्द
कविता में उतरकर !
आचार्य विजय ” गुंजन ”

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

20 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
January 15, 2014

क्यों कि शब्द ब्रह्म होता है अब वे नहीं बोलेंगे बोलेगा केवल शब्द… शब्दो से ही ज्ञान निर्माण और प्रसार हुआ है …. आप का लेख अतिउत्तम है !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 15, 2014

    अमन जी ! हार्दिक आभार ! पुनश्च !!

ikshit के द्वारा
January 14, 2014

अति सुन्दर श्रीमान!. बहुत ही प्रेरक शब्द-संचयन है.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 15, 2014

    इक्षित जी , नमन ! सर्वप्रथम मेरे ब्लॉग पर आप का हार्दिक स्वागत है ! कम शब्दों में उत्तम प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! पुनश्च !

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 10, 2014

प्रांजल भाषा -शैली में प्रस्तुत आपकी रचना सराहनीय है .आभार

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 10, 2014

    शिखा जी ! हार्दिक आभार !!

yogi sarswat के द्वारा
January 9, 2014

सचमुच अक्षरों की सारी अक्षुण्ण संजीवनी संचरित होती है शब्दों में यदि शब्द आज ब्रह्म है तो इसका सारा श्रेय उन अक्षरों को जाता है जिनसे उनका निर्माण हुआ है अगर शब्द आज सुरक्षित है तो चमत्कार है उन अक्षरों का जो कवच बनकर एकाकार हैं उनकी काया में . अपना सारा अस्तित्व समर्पित कर दिया है अक्षरो ने अत्यंत सुन्दर शब्द श्री आचार्य ji !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 9, 2014

    मान्य भाई योगी सारस्वत जी ! सुन्दर और उत्साहवर्धक प्रतिक्रया के लिए आभारी हूँ !!

vaidya surenderpal के द्वारा
January 9, 2014

सुन्दर भावपूर्ण कविता।

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 9, 2014

    हार्दिक धन्यवाद सुरेंदर पाल जी ! सादर !1

yatindranathchaturvedi के द्वारा
January 9, 2014

अद्भुत, सादर।

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 9, 2014

    हार्दिक आभार यतीन्द्र जी !

ranjanagupta के द्वारा
January 8, 2014

शब्द की जादूगरी और उसकी महिमा का उल्लेख !वर्णात्मक भाषा भाव !विशेष बधाई !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 9, 2014

    आदरणीय रंजना जी ! हार्दिक आभार ! तह और गहराई की पड़ताल के लिए विशेष आभार !सादर !

jlsingh के द्वारा
January 7, 2014

कंटेस्ट के लायक उपयुक्त है कविता और इनमे प्रयुक्त अक्षर और शब्द! सादर बधाई और शुभकामनाएं!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 7, 2014

    आदरणीय भाई जवार लाल सिंह जी , सादर अभिवादन ! यह आप की अपनी सोंच है और मेरे प्रति अतिरिक्त प्रेम !हार्दिक आभार !

sanjay kumar garg के द्वारा
January 6, 2014

आदरणीय विजय जी, सादर नमन! सुन्दर गूढ़ अर्थमय कविता प्रस्तुत करने के लिए आभार!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 6, 2014

    हार्दिक धन्यवाद संजय जी ! नव वर्ष मगलमय हो !

January 6, 2014

बहुत सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .नव वर्ष २०१४ की हार्दिक शुभकामनाएं

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 6, 2014

    शालिनी जी ! शुक्रिया ! नया साल आप को मुबारक हो !


topic of the week



latest from jagran