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जीवन में खुशियाँ भरे सुन्दर हो परिवेश ( अटल संकल्प ब्लॉग आमंत्रण )

Posted On: 12 Jan, 2014 Others में

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नया साल सबको बहुत हो सुहाना !
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चले जा रहे हैं सभी गम भुलाए
सिमट आप में आह जी में चुराए
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मगर याद में आ न आँसू बहाना !
नया साल सबको बहुत हो सुहाना !!
=
जागरण जंक्शन मंच के माननीय सम्पादक – मंडल के सदस्यगण , जे.जे. से जुड़े तमाम वरेण्य साहित्यिक मित्रो तथा मेरे सहृदय पाठक साथियो ! नूतन वर्ष के नूतन परिवेश में आप सभी का मेरा हार्दिक अभिनन्दन ! सर्वप्रथम मैं जे.जे.के व्यवस्थापकों व सम्पादक – मंडली के सदस्यों के प्रति अपना आभार प्रकट करता हूँ कि जिन्होंने इस लोकप्रिय मंच पर हमें पुष्पित व पल्लवित होने का सुअवसर प्रदान किया साथ ही विविध प्रतिस्पर्धाओं , आयोजनों व प्रतियोगिताओं का संयोजन कर लिखने की एक ललक पैदा की |मैं उन सभी साहित्यिक मित्रों का भी आभार प्रकट करता हूँ जिन्होंने प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से अपनी-अपनी उत्साहवर्धक प्रतिक्रियाओं से परस्पर एक- दूसरों की लेखिनी को सम्बल प्रदान किया |मैं उनके प्रति भी अपनी हार्दिकता व्यक्त करता हूँ जो अब इस मंच पर सक्रिय नहीं हैं या मंच को छोड़कर चले गए तथा कभी अपनी भावनाओं और अपने बहुमूल्य विचारों को साझा किया करते थे | अपनों के जाने का गम तो होता ही है पर यह सोंचकर मन को धैर्य देना पड़ता है कि ” कुछ तो मज़बूरियाँ रही होंगी , यों कोई बेवफा नहीं होता ” | जिस प्रकार किसी भी कवि- सम्मलेन व मुशायरों का सारा दारोमदार श्रोताओं पर टिका होता है ठीक उसी प्रकार रचनाकारों की रचनाओं का अस्तित्व पाठकों के बिना अधूरा होता है | मैं उन सभी सहृदय पाठकों का विशेष रूप से साधुवाद देता हूँ जिन्होंने इस जे.जे.को अपना साथी बनाकर प्रतिष्ठा और सम्मान दिया |
मित्रो ! इस मंच पर साहित्य की लगभग सारी विधाओं में लेखन होता है और आगे भी होता रहेगा | साहित्य समाज का दर्पण होता है और कविता ( काव्य ) उसकी मुख्य धारा | काव्यान्तर्गत कविता – गीत – नवगीत – दोहे – ग़ज़ल – शेरो-शायरी – छंद-सबैये-कुण्डलिया-व घनाक्षरी आदि-आदि प्रकार हैं जिनमें अनवरत अभिव्यक्तियाँ जारी हैं | ये तो हुईं छन्दधारान्तर्गत आनेवालीं पिगलशास्त्रीय मान्यताएँ ! बंधुओ ! कविता तो एक नदी हैं और नदी अपनी धाराएँ बदलती रहती हैं | फलतः आजकल निर्बंध अर्थात् छंदमुक्त समकालीन कविताएँ बड़े जोरों से जोशों-खरोश के साथ लिखी जा रही हैं और कथ्य- शिल्प – भावभंगिमाओं व उत्कृष्ट अर्थ अवबोधन की दृष्टि से उत्तम सृजनधर्मिता की श्रेणी में शुमार की जा रही हैं | पर जहाँ तक छांदस सृजनधर्मिता का सवाल है तो वहाँ तो नियम और नियमानों का कठोर अनुशासन है | कभी-कभार मैं हानि-लाभ की परवाह किए बिना अपनी अल्पबुद्धि का परिचय देते हुए मंच पर प्रकाशित छांदस रचनाओं ( गीत-ग़ज़लों )में टाँग अड़ा देता हूँ जिसके चलते अपेक्षाओं के प्रतिकूल उपेक्षाओं का शिकार हो जाता हूँ | मैं इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ | इस नए साल में ऐसा न करने का संकल्प लेते हुए उपर्युक्त विषयक सन्दर्भ में एक विवरणात्मक आलेख मंच पर देने की मेरी इच्छा है | इसके अतिरिक्त मेरे कुछ और भी संकल्प हैं जिसकी प्रतिपूर्ति हेतु कहीं-कहीं पर ईश्वर से याचना नीचे लिखे दोहों के माध्यम से की गई है , आशा है ये दोहे आप को पसंद आयेंगे :-
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नए साल में एक धुन भेजो शुभ सन्देश ,
जीवन में खुशियाँ भरे सुन्दर हो परिवेश !
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शरद-शिशिर-हेमंत की बहुत हुई अब बात ,
अब वसंत में रजत दिन, कंचन सी हो रात !
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प्रश्न खड़े हल के लिए रहे कुंजिका खोज ,
उत्तर अब सेवक बने खड़े रहेंगे रोज !
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विगत वर्ष के क्लेश को धो देंगे हम आज ,
जीने का नव वर्ष में ऐसा हो अंदाज़ !
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प्रगति-पंथ पर बढ़ पथिक झाँक रहा उन्मेष ,
चौकन्नी उसकी नजर लगे न पग को ठेंस !
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जन-प्रतिनिधि को ईश तुम ऐसा देना ज्ञान ,
चौर्य कर्म को तज करें जनता का कल्याण !
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संसद में दिन-रात हो सदाचार का जाप ,
धूल जाए पापिष्टियों के सारे अब पाप !
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सोने – हीरे – मोतियों से भर जाए देश ,
फिर हो पूरे विश्व में अनुपम इसका वेश !
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खस्सी – मुर्गे – मुर्गियाँ चढ़ीं स्वाद की भेंट ,
नए साल की बात है कौन पूछता रेट !
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घूसखोर लतखोर बन नहीं रहे हैं मान ,
हे प्रभु इस नव वर्ष में उनको दो सद्ज्ञान
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छंद खोजती साधना यति -गति -लय में लीन ,
धार मुख्य साहित्य का होए नहीं मलीन !!
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सरसों – तीसी -मटर के अलग -अलग हैं रंग ,
झूमें इस नव वर्ष में मिल गेहूँ के संग !
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खेतों के पुष्टान्न से भर जाए खलिहान ,
होवे नूतन वर्ष में हर दिन नया विहान !
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आप सभी का अज़ीज ;-
– आचार्य विजय ‘ गुंजन ‘

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vaidya surenderpal के द्वारा
January 15, 2014

आचार्य गुंजन जी, सुन्दर, सार्थक और विचारणीय आलेख के लिए बधाई।

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 15, 2014

    आदरणीय वैद्य सुरेंदर पाल जी , सादर अभिवादन ! उत्साहवर्धक प्रतिक्रया के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !

sanjay kumar garg के द्वारा
January 13, 2014

आदरणीय आचार्य जी, सादर नमन! सुन्दर मुक्तकों के लिए बधाई!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 13, 2014

    मान्य संजय जी , साभिवादन ! ये दोहे आप को अच्छे लगे , बड़ी बात है ! हार्दिक आभार !

January 12, 2014

बहुत सुन्दर प्रस्तुति .नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 13, 2014

    शालिनी जी, सादर ! आप की प्रतिक्रिया से उत्साह बढ़ा ! आभारी हूँ !आप को भी नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं !

jlsingh के द्वारा
January 12, 2014

जे जे के इस मंच पर, बिखरे ढेरों ज्ञान. पाठक जन मन में गुने, दें उपदेश सुजान. एक कोशिश मेरी बी मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 13, 2014

    आदरणीय भाई , सादर ! काव्यमय प्रतिक्रिया के लिए विशेष आभार ! पुनश्च !!


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