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" जगत का प्रथम गणतंत्र "

Posted On: 26 Jan, 2014 कविता,Contest में

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वैशाली तू ही जननी है जगत-प्रथम गणतंत्र !
=
दिग-दिगंत में गूँज रही है
अब भी तेरी महिमा,
है वरेण्य अब भी तेरी
मिट्टी की पावन गरिमा |
=
भुला नहीं पाएगा जग यह सिद्ध- बुद्ध के मन्त्र !
वैशाली तू ही जननी है जगत-प्रथम गणतंत्र !!
=
कालखंड का स्वर्णिम युग -
इतिहास रहा है मंडित,
कोई रिपु भी उधम मचा
कर सका न इसको खंडित |
=
रचे गए तबसे अबतक जाने कितने षड्यंत्र !
वैशाली तू ही जननी है जगत-प्रथम गणतंत्र !!
=
बनी प्रेरणा – स्रोत जगत के लिए
धरा हरसाई ,
वैशाली के कण-कण तुमको
सौ-सौ बार दुहाई |
=
सपने में भी फिर न कभी भारत होगा परतंत्र !
वैशाली तू ही जननी है जगत-प्रथम गणतंत्र !!
=
——————- दो————————-
=———- भारत का गणतंत्र ————–
गूँज रहा धरती -अम्बर में भारत का गणतंत्र !
=
घनावरण को चीर तमस के
आया यह आलोक ,
दूर कर रहा सदियों से
जन-मन में फैला शोक|
=
करे न बाधित इसको फिर तिकड़मियों का षड्यंत्र !
गूँज रहा धरती -अम्बर में भारत का गणतंत्र !!
=
प्रगति-पंथ पर बढ़ भास्वर हो
चमके अपना देश ,
निखिल विश्व को करे चमत्कृत
ऐसा हो उन्मेष |
=
हो लें आज उच्चरित फिर से ऋषि-मुनियों के मन्त्र !
गूँज रहा धरती -अम्बर में भारत का गणतंत्र !!
आचार्य विजय ‘ गुंजन ‘

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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

acharyashivprakash के द्वारा
March 3, 2014

आचार्य श्री आपकी लेखनी देखकर मंत्र मुग्ध हूँ ….एक छंद आपको पूर्ण श्रधा के साथ समर्पित करता हूँ …. आचार्य श्री तुम ज्ञान के प्रतिमान औ गुणवान हो | कविता गजल औ गीत विद्या पूर्ण विद विद्वान् हो || तुमसा नहीं कवि श्रेष्ठ कोई शारदा वरदान हो | ये कामना हम कर रहे है आपका सम्मान हो ||

ranjanagupta के द्वारा
February 13, 2014

आचार्य जी !प्रतियोगिता में विजयी होने पर आपको बहुत बहुत बधाई !पर आपके पुत्र के स्वास्थ्य को लेकर मन में चिंता हो गयी !कृपया उसके स्वस्थ जोने की भी सूचना मंच पर दीजियेगा !ईश्वर आपके पुत्र को शीघ्र स्वस्थ करे !!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 14, 2014

    मान्या रंजना जी , सादर ! आप को भी बधाई ! आप सबों की सद्भावना व आशीर्वाद दोनों ने ही काम किए , अब पुत्र पूर्ण स्वस्थता की ओर तेजी से अग्रसर है ! हार्दिक आभार !!

yamunapathak के द्वारा
January 30, 2014

गुन्जन जी आपकी प्रत्येक कविता के शब्द बहुत ही परिष्कृत होते हैं .इस कविता की पहली कविता ऐतिहासिकता के कारण और भी सुन्दर लगी साभार

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 31, 2014

    सम्मानया यमुना जी ! यह aap ke samarthan ar atrikt सद्भावना का प्रतिफल है ! सादर आभार !

yogi sarswat के द्वारा
January 29, 2014

बनी प्रेरणा – स्रोत जगत के लिए धरा हरसाई , वैशाली के कण-कण तुमको सौ-सौ बार दुहाई | = सपने में भी फिर न कभी भारत होगा परतंत्र ! वैशाली तू ही जननी है जगत-प्रथम गणतंत्र !! लेखनी में जादू है आपकी श्री आचार्य जी ! बधाई , एक बेहतरीन रचना के लिए

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 31, 2014

    मान्य भाई योगी जी ! कृतार्थ और धन्य हूँ कि मेरे प्रति आप का ऐसा उत्तम विचार है ! पुनः-पुनः आभार !!

yatindrapandey के द्वारा
January 28, 2014

हमेशा कि अलग और सुन्दर रचना

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 28, 2014

आदरनीय गुंजन जी,देश की महिमा और देश प्रेम के जितने सुंदर भाव उतने सुंदर शब्द . दोनों ही उत्तम रचनाएँ . बधाई , निर्मल

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 28, 2014

    उत्साहवर्धक प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! निर्मला जी ! पुनश्च !!

ajay kumar pandey के द्वारा
January 27, 2014

आदरणीय आचार्य जी उत्तम कविता कृपया मेरे ब्लॉग का अवलोकन करें कविता नटवरलाल केजरीवाल

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 28, 2014

    संजय जी ! आभार !

sadguruji के द्वारा
January 27, 2014

भुला नहीं पाएगा जग यह सिद्ध- बुद्ध के मन्त्र ! वैशाली तू ही जननी है जगत-प्रथम गणतंत्र !! हो लें आज उच्चरित फिर से ऋषि-मुनियों के मन्त्र ! गूँज रहा धरती -अम्बर में भारत का गणतंत्र !!बहुत सुंदर और सार्थक रचना आपको बहुत बहुत बधाई.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 28, 2014

    सद्गुरु जी ! सादर ! सश्रद्ध !! पुनश्च !

ranjanagupta के द्वारा
January 27, 2014

वाह आचार्य जी बेहद सुघड़ सुन्दर देश भक्ति पूर्ण गीत !!शब्दों का अद्वितीय संयोजन !!बधाई !रचना की प्रभावोत्पादकता हेतु !!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 28, 2014

    बहुत-बहुत आभार ! रंजना जी ! सादर ! पुनश्च !!

jlsingh के द्वारा
January 27, 2014

बहुत ही सुन्दर रचना आदरणीय आचार्य जी, प्रगति-पंथ पर बढ़ भास्वर हो चमके अपना देश , निखिल विश्व को करे चमत्कृत ऐसा हो उन्मेष | यही है अपना भारत तेश!

    jlsingh के द्वारा
    January 27, 2014

    यही है अपना भारत देश!!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 28, 2014

    आदरणीय भाई जबाहर लाल सिंह जी , सादर अभिवादन ! बस आप की कृपा बनी रहे , यही कामना है ! आभार !

ranjanagupta के द्वारा
January 26, 2014

वाह आचार्य जी बेहद सुघड़ सुन्दर देश भक्ति पूर्ण गीत !!शब्दों का अद्वितीय संयोजन !!बधाई !!!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 26, 2014

    हार्दिक धन्यवाद रंजना जी इस आत्मीयपूर्ण सुन्दर मंतव्य के लिए ! सादर !!

OM DIKSHIT के द्वारा
January 26, 2014

आचार्य जी, अभिवादन आप को ,आप के विचारों को और ‘भारत के गणतंत्र’ को.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 26, 2014

    हार्दिक आभार ओम दीक्षित जी ! पुनश्च !


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