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ये बहेलिये फिर से जाल बिछाने आए हैं

Posted On: 16 Apr, 2014 Others,कविता,Others में

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पाँच बरस के बाद पुनः पटियाने आये हैं !
उलझे दिल के तारों को सुलझाने आए हैं !!
=
जोड़े हाथ दिने- दुपहरिये मारे हैं फिरते
चाटुकार-चमचे झुक-झुककर चरणों में गिरते
=
वही पुराने झूठे कोरस गाने आए हैं !
पाँच बरस के बाद पुनः पटियाने आये हैं !!
=
आश्वासन के चिकुड़-जाल में फिर से फाँसेंगे
सूखी आँखों में आशा के आँजन आँचेंगे
=
बुझे हुए सपनों के दीप जलाने आए हैं !
पाँच बरस के बाद पुनः पटियाने आये हैं !!
=
अभी नाँच हैं रहे बाद में तुझे नचाएंगे
बात-बात पर संसद में फिर तुझे भुनायेंगे
=
ये बहेलिये फिर से जाल बिछाने आए हैं !
पाँच बरस के बाद पुनः पटियाने आये हैं !!
=
भड़काऊ भाषण दे – दे दंगे करवाएंगे
विस्थापित लोगों के फिर वे घर बनवायेंगे
=
यही वचन फिर आज यहाँ दुहराने आए हैं !
पाँच बरस के बाद पुनः पटियाने आये हैं !!
=
जो भी मांगो आज नहीं कल सबकुछ दे देंगे
कई दलों के दलदल में मिल दाल गलायेंगे
=
बहुरूपिये ये फिर से तुझे फँसाने आए हैं !
पाँच बरस के बाद पुनः पटियाने आये हैं !
= – आचार्य विजय ‘ गुंजन ‘

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
May 13, 2014

सही कहा ,आचार्य जी ,यह बहेलिये ही हैं, जो भोली भाली जनता पे अपने बादो का दाना डालकर फिर उन्हें आश्वासनों के जाल में फंसाना चाहते हैं …श्रेष्ट रचना हेतु वधाई….

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    May 31, 2014

    समर्थन के लिए बहुत-बहुत आभार सुषमा जी ! सादर !

deepak pande के द्वारा
April 21, 2014

बहुत खूबसूरत रचना आज के परिप्रेक्ष्य ME EKDAM SAHEE FARMAYA

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 23, 2014

    हार्दिक धन्यवाद आदरणीय दीपक पाण्डे जी !सराहना के लिए आभारी हूँ !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 23, 2014

    मान्य भाई योगी जी, सादर नमन ! समर्थन से बल मिला ! साभार !!

jlsingh के द्वारा
April 20, 2014

बहुत ही सुन्दर आचार्य जी … जो भी मांगो आज नहीं कल सबकुछ दे देंगे कई दलों के दलदल में मिल दाल गलायेंगे = बहुरूपिये ये फिर से तुझे फँसाने आए हैं ! पाँच बरस के बाद पुनः पटियाने आये हैं !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 21, 2014

    हार्दिक धन्यवाद आदरणीय भाई जे.एल. सिंह जी ! सादर !!

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
April 19, 2014

sarthak vyangyatmak rachna hetu badhai

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 20, 2014

    हार्दिक आभार ! शिखा जी ! पुनश्च !!

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
April 19, 2014

जो भी मांगो आज नहीं कल सबकुछ दे देंगे कई दलों के दलदल में मिल दाल गलायेंगे यथार्थ को दर्शाती अच्छी रचना ..जनता की आँखें खोलती हुयी …सुन्दर भ्रमर ५

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 20, 2014

    मान्य भाई भ्रमर जी, प्रेम भरा नमस्कार ! समर्थन के लिए आभार ! पुनश्च !!

Shivendra Mohan Singh के द्वारा
April 19, 2014

हा हा हा….. सुंदर कटाक्ष वर्तमान राजनीतिज्ञों पर. कभी हमारे ब्लॉग पर भी पधारें http://rjanki.jagranjunction.com

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 20, 2014

    सर्वप्रथम मेरे ब्लॊग पर आप का स्वागत है ! मान्य भाई शिवेंद्र जी !प्रतिक्रियार्थ हार्दिक आभार !!

sadguruji के द्वारा
April 18, 2014

आदरणीय आचार्य जी,सादर अभिनन्दन ! सही कहा है आपने-जो भी मांगो आज नहीं कल सबकुछ दे देंगे कई दलों के दलदल में मिल दाल गलायेंगे..काफी दिनों के इंतजार के बाद आपने पुन:एक बहुत सार्थक व सुन्दर रचना.प्रस्तुत की है.आपको बहुत बहुत बधाई.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 18, 2014

    सानुपेक्षित प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ आदरणीय सद्गुरु जी ! सादर !!

sanjay kumar garg के द्वारा
April 17, 2014

“पाँच बरस के बाद पुनः पटियाने आये हैं ! उलझे दिल के तारों को सुलझाने आए हैं !!” बहुत सुन्दर आदरणीय आचार्य जी! बधाई व् धन्यवाद! मेरी ओर से ५ स्टार स्वीकार कीजिये, आदरणीय आचार्य जी!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 18, 2014

    मान्य भाई संजय जी बहुत-बहुत आभार ! यही तो आप का बड़प्पन है ! सादर !!

ranjanagupta के द्वारा
April 16, 2014

आचार्य गुंजन जी !सादर ! बहुत सामयिक और व्यंग्य परक रचना !बहुत बहुत बधाई ,और आपके स्वास्थ्य की शुभकामना केसाथ ,पुनश्च !!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 16, 2014

    बहुत-बहुत आभार रंजना जी ! सादर !!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 16, 2014

अभी नाच है रहे बाद में तुझे नचाएंगे,बात बात पर संसद में फिर तुझे भुनाएंगे ,ये बहेलिये फिर से जाल बिछाने आये हैं ,— एक दम सही आकंलन ,बहुत सुंदर रचना ,विजय जी सादर बधाई .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    April 16, 2014

    हार्दिक धन्यवाद निर्मला जी ! शेष फिर ! सादर !!


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