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लिखेंगे संघर्ष ही हम

Posted On: 11 Jun, 2014 Others,social issues,कविता में

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रह गए कुछ अगाये
कुछ अनछुए
जो गीत !
फिर कभी मिलना
सुना देंगे तुम्हें
हम मीत !!
=
है बहुत फिसलन डगर में
जिंदगी की
रह गई कीमत नहीं अब
वन्दगी की
=
पड़ गई आज
फीकी सुनहली
वह रीत !
फिर कभी मिलना
सुना देंगे तुम्हें
हम मीत !!
=
दर्द के रिश्ते बहुत
संधील होते
जल रहे ज्यों पंक्ति में
कंदील होते
=
राह में मिलती नहीं अब
बटोही को प्रीत !
फिर कभी मिलना सुना देंगे
तुम्हें हम मीत !!
=
मिल रहे पग-पग
यहाँ पर ज़ख्म
गहरे
भावनाओं पर पड़ें
दिन – रात
पहरे
=
लिखेंगे संघर्ष ही हम
हार हो या
जीत !
फिर कभी मिलना
सुना देंगे तुम्हें
हम मीत !!
=
खोजता हूँ मिले ऐसा
एक साथी
क्रान्ति की फिर सुलग जाए
आज भाँथी
=
हो गए हैं आज
सत्ता के यहाँ
सब क्रीत !
रह गए कुछ अगाये
कुछ अनछुए
जो गीत ……… फिर कभी…………….!!

आचार्य विजय गुंजन

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
January 2, 2015

आदरणीय आचार्या जी ! नववर्ष आपके और आपके समस्त परिवार के लिए मंगलमय हो ! आशा है कि नववर्ष पर आपकी वैचारिक उपस्थिति इस मंच पर होगी !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 17, 2015

    श्रद्धेय सद्गुरु जी , सादर अभिवादन !! शुभकामनाओं के लिए आभारी हूँ ! मंच पर उपस्थिति की कोशिश करूंगा ! कभी – कभी अनुरक्ति से विमुख होकर आदमी विरक्ति की और रुख कर लेता है और यह सब खुद व खुद स्वाभाविक और सहज ही चलता रहता है ! आप तो स्वयं सिद्ध पुरुष हैं , सब कुछ समझते हैं I पुनश्च !!

Ravindra K Kapoor के द्वारा
June 21, 2014

आचार्यजी इस सुन्दर गीत की प्रस्तुति के लिए आप को अभिनन्दन. किन्हीं कारणों से देरी से प्रतिक्रिया के लिए छमा चाहता हूँ .”रह गए कुछ अगाये कुछ अनछुए जो गीत ! फिर कभी मिलना सुना देंगे तुम्हें हम मीत !!” सुभकामनाओं के साथ … रवीन्द्र के कपूर

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 21, 2014

    मान्य भाई रवीन्द्र जी, सादर अभिवादन ! देर से ही सही सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ ! पुनश्च !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 21, 2014

    आदरणीया सुषमा जी, सादर ! आप की प्रतिक्रिया स्पैम में पडी थी वहां से निकालने की कोशिश की पर पता नहीं फिर कहाँ अंतर्ध्यान हो गई ! सद्भावना के लिए आभारी हूँ !!

deepak pande के द्वारा
June 16, 2014

लिखेंगे संघर्ष ही हम हार हो या जीत ! फिर कभी मिलना सुना देंगे तुम्हें हम मीत !! waah sangharsh hee jeewan hai kee sachchai बताती panktiyaan

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 20, 2014

    मान्यवर दीपक पाण्डेय जी , सादर अभिवादन ! सद्भावना हेतु आभारी हूँ ! सहयोग व सम्बन्ध बनाए रखें ! पुनश्च !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 16, 2014

राह में मिलती नहीं अब बटोही को प्रीत ! फिर कभी मिलना सुना देंगे तुम्हें हम मीत !!बहुत दिन बाद आपकी रचना पढने को मिली ,कविता की हर पंक्ति विशेष है और गहरी सोच का दर्पण  है , सादर बधाई एवं शुभकामनायें विजय जी .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 17, 2014

    maamyaa nirmalaa jee, saabhivaadan !sadbhaavnaon ke lie aabhaaree hoon !punashch !!

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 14, 2014

SUNDAR V SARTHAK .AABHAR

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 15, 2014

    हार्दिक आभार शिखा जी !!

sadguruji के द्वारा
June 14, 2014

आदरणीय आचार्या जी ! सादर अभिनन्दन ! बहुत प्रेरक और सुन्दर रचना ! मन को स्पर्श करती पंक्ति-राह में मिलती नहीं अब बटोही को प्रीत ! फिर कभी मिलना सुना देंगे तुम्हें हम मीत !! बहुत बहुत बधाई !

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 15, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन ! सुन्दर सराहना के शब्दों से रचनात्मकता से बल मिला ! हार्दिक आभार !!

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 13, 2014

दर्द के रिश्ते बहुत संधील होते जल रहे ज्यों पंक्ति में कंदील होते आदरणीय आचार्य जी एक से बढ़ एक ..सुन्दर भाव ,,,बार बार पढ़ आनंद लिया आभार भ्रमर ५

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 15, 2014

    मान्य भाई भ्रमर जी , सादर ! आप का समर्थन कुछ और नया करने को सदैव उत्प्रेरित करता है !! आभार !

Sushma Gupta के द्वारा
June 13, 2014

बहुत सुन्दर भाव-प्रधान रचना , गुंजन जी ..

sanjay kumar garg के द्वारा
June 12, 2014

“मिल रहे पग-पग यहाँ पर ज़ख्म गहरे, भावनाओं पर पड़ें दिन – रात पहरे, लिखेंगे संघर्ष ही हम हार हो या जीत” अति सुन्दर अभिव्यक्ति! आदरणीय विजय गुंजन जी! आप काफी दिनों में लिख रहें है, जल्दी-जल्दी लिखियेगा! धन्यवाद! आचार्यवर!

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    June 12, 2014

    संजय जी , सादर !इधर अति व्यस्तता – उलझन और स्वास्थ्य – कारणों से मंच पर आना कम हो रहा है | अब बने रहने की फिर से कोशिश कर रहा हूँ ! प्रतिक्रिया और सद्भावना के लिए हार्दिक आभार !!


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