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अन्ना जी के दोनों चेले

Posted On: 22 Jan, 2015 Others,कविता,Others में

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अन्ना जी के दोनों चेले

अन्ना जी के दोनों चेले,
आपस में कर रहे झमेले
राजनीति है गहरा दलदल,
इसमें केवल है कल-बल-छल

जिसमें खम है वही धकेले,
अन्ना जी के दोनों चेले|

दिल्ली दिल अब किसको देगी
बदले में किससे क्या लेगी,
प्रीत-प्रेम के पावन मेले,
अन्ना जी के दोनों चेले
आपस में कर रहे झमेले|

इधर केजरी उधर किरण है,
सकते में पड़ गयी हिरण है
दिल्ली अब किस-किस को झेले,
अन्ना जी के दोनों चेले
आपस में कर रहे झमेले|

हैं उदास रालेगण वाले,
सभी आ गए जड़कर ताले
गुरु जी अब पड़ गए अकेले
अन्ना जी के………..|

सबके अपने-अपने दावे
अपना मुँह अपने गुण गावे
अजब गजब हैं ये अलबेले,
अन्ना जी के……….|

खाली दिल्ली की कुर्सी है
दीदी फिर से आ हुलसी है,
जन -गण -मन में प्रीत उड़ेले
अन्ना जी के………|

एक फूल है एक खार है,
इधर प्यार है उधर मार है
जिसको जी चाहे जो लेले,
अन्ना जी के दोनों चेले ,
आपस में कर रहे झमेले |
आचार्य विजय गुंजन

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
January 25, 2015

कीचड जब पाँव फंसे हों, पाले खुद नित नए झमेले अन्ना जी के दोनों चेले आदरणीय गुंजन जी अन्ना जी ठीक ही तो कहते थे. अब दोनों राजनीति के कीचड में फंसकर एक दुसरे पर कीचड फेंक रहे हैं.

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    February 9, 2015

    आप ने ठीक ही कहा ! आदरणीय भाई ! सादर !

January 23, 2015

सही कहा आचार्य जी दोनों उन्हीं के चेले हैं और कर रहे झमेले हैं .

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 28, 2015

    शालिनी जी, नमस्कार ! प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ !!

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 23, 2015

आचार्य जी लगता है आप अन्ना जी को चिडा रहे हैं ,किंतु अन्ना तो पहिले ही कह चुके हैं मैं राजनीति की कीचड मैं नहीं पडना चाहता । इसी लिए पुरातन ऋषी मुनी उचित पात्र को ही गुरु मंत्र देते थे । तभी तो ओम शांति शांति रहती होगी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 28, 2015

    मान्यवर हरिश्चंद्र jee , सादर अभिवादन ! aap ne theek कहा ! प्रतिक्रिया के लिए aabhaaree hoon !!


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